CBSE/UGCNET/JRF, Dec-2015 HINDI-2

 

https://www.hindisahityavimarsh.com/

hindisahityavimarsh.blogspot.com   

CBSE/UGCNET/JRF, Dec-2015 HINDI-2

  1. इनमें से किस बोली का बिहारी हिन्दी से संबंध नहीं है?

(1) अवधी (2) मगही (3) भोजपुरी (4) मैथिली

  1. ANS : (1) अवधी
  2. हिन्दी साहित्य का अतीतके लेखक हैं :

(1) विश्वनाथ प्रसाद मिश्र   (2) विश्वनाथ त्रिपाठी

(3) श्यामसुन्दर दास       (4) गणपतिचन्द्र गुप्त

  1. ANS : (1) विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
  2. दोहा (दूहा) किस भाषा का छंद है?

(1) प्राकृत    (2) अपभ्रंश   (3) हिंदी     (4) संस्कृत

ANS : (2) अपभ्रंश

  1. संदेसडउ सवित्थरउ हउँ कहणउँ असमत्थ।

  भण पिय इक्कति बलिमडइ बेवि समाणा हत्थ।

    उपर्युक्त दोहा किसका है?

(1) नरपति नाल्ह (2) हेमचंद्र (3) अब्दुर्रहमान (4) शारंगधर

ANS : 4. (3) अब्दुर्रहमान

  1. जो नर दुख में दुख नहिं मानै।

   सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जानै।

      इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(1) सूरदास   (2) गुरुनानक (3) कबीरदास (4) रैदास

ANS : (2) गुरुनानक

  1. निम्नलिखित में से कौन अष्टछापका कवि नहीं है?

(1) कुम्भनदास (2) कृष्णदास (3) छीतस्वामी (4) ध्रुवदास

ANS : (4) ध्रुवदास

  1. तुम नीके दुहि जानत गैया।

  चलिए कुंवर रसिक मनमोहन लागौं तिहारे पैयाँ।

      इन काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(1) सूरदास   (2) कुम्भनदास (3) नंददास (4) परमानंददास

ANS : (2) कुम्भनदास

  1. निम्नलिखित में से कौन हनुमच्चरित्का रचयिता है?

(1) नाभादास (2) तुलसीदास (3) रायमल्ल पांडे   (4) अग्रदास

ANS : (3) रायमल्ल पांडे

  1. ललित ललामकिसका ग्रंथ है?

(1) जसवंत सिंह    (2) भूषण    (3) पद्माकर (4) मतिराम

ANS : (4) मतिराम

  1. डेल सो बनाय आय मेलत सभा के बीच

    लोगन कबित्त कीबो खेल करि जानो है।

      ये काव्य पंक्तियाँ किसकी हैं?

(1) आलम   (2) बोधा     (3) ठाकुर    (4) द्विजदेव

ANS : (3) ठाकुर

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा लेखक भारतेन्दु-मण्डल का नहीं है ?

(1) प्रताप नारायण मिश्र    (2) बदरीनारायण चौधरी प्रेमघन

(3) बालकृष्ण                   (4) राजा लक्ष्मण सिंह

ANS : (4) राजा लक्ष्मण सिंह

  1. रसकलशकिसकी रचना है?

(1) श्रीधर पाठक (2) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध

(3) गयाप्रसाद शुल्क सनेही’ (4) मैथिलीशरण गुप्त

ANS : (2) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध

  1. निम्नलिखित पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

      ‘‘क्या कहा मैं अपना खंडन करता हूँ ?

      ठीक है तो मैं अपना खंडन करता हूँ;

      मैं विराट् हूं मैं समूहों को समोये हूँ।’’

(1) जयशंकर प्रसाद        (2) सुमित्रानंदन पंत

(3) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (4) रामधारी सिंह दिनकर

ANS : (3) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

  1. ‘‘आज मैं अकेला हूँ, अकेले में रहा नहीं जाता

     जीवन मिला है यह, रतन मिला है यह’’

      उपर्युक्त काव्य-पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

(1) त्रिलोचन  (2) केदारनाथ (3) नागार्जुन  (4) रघुवीर सहाय

ANS : (1) त्रिलोचन

  1. निम्नलिखित में से किस उपन्यास को स्त्री लेखन का प्रस्थान बिंदु माना जाता है?

(1) मित्रो मरजानी   (2) कठगुलाब (3) आवाँ (4) चाक

ANS : (1) मित्रो मरजानी

  1. निम्नलिखित में से दो समानान्तर कथा-प्रसंगों पर चलने वाला शंकर शेष का नाटक है?

(1) कोमल गांधार    (2) पोस्टर (3) एक और द्रोणाचार्य  (4) अरे मायावी सरोवर

ANS : (3) एक और द्रोणाचार्य

  1. ‘‘कविता करना अनन्त पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनन्त उत्कण्ठा से कवि जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई।’’ यह संवाद-पंक्ति जयशंकर प्रसाद के किस नाटक की है?

(1) चन्द्रगुप्त (2) ध्रुवस्वामिनी     (3) स्कन्दगुप्त      (4) राज्यश्री

ANS : (3) स्कन्दगुप्त

  1. ठेसकहानी के लेखक हैं :

(1) अज्ञेय (2) फणीश्वरनाथ रेणु   (3) अमरकांत (4) मोहन राकेश

ANS : (2) फणीश्वरनाथ रेणु

  1. निम्नलिखित में से महावीर प्रसाद द्विवेदी का कथन कौन-सा है?

(1) भाषा संसार का नादमय चित्रा है, ध्वनिमय स्वरूप है।

(2) मनुष्यों की मुक्ति की तरह कविता की भी मुक्ति होती है।

(3) कवित्व को आत्मा की अनुभूति कहते हैं।

(4) अर्थ सौरस्य ही कविता का प्राण है।

ANS : (4) अर्थ सौरस्य ही कविता का प्राण है।

  1. निम्नलिखित में से कौन-सी कृति आई॰ ए॰ रिचर्ड्स की नहीं है?

(1) प्रिंसिपल्स ऑफ़ लिटरेरी क्रिटिसिज्म   (2) द फिलॉसफी ऑफ रेटरिक

(3) कल्चर एंड अनार्की                 (4) इंटरप्रटेशन इन टीचिंग

ANS : (3) कल्चर एंड अनार्की

आई. ए. रिचर्ड्स की रचनाएँ : प्रिंसिपल ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्म (1926 ई.), कॉलरिज ऑन इमैजिनेशन (1934 ई.), मेन्सियस ऑफ द माइंड (1931 ई.), एक्सपेरिमेंट्स इन मल्टीपल डेफिनेशन (1932 ई.), बेसिक रूल्स ऑफ़ रीज़न (1933 ई.), द फिलॉसफ़ी ऑफ रेटरिक (1936 ई.), इंटरप्रटेशन इन टीचिंग (1938 ई.), द स्पेक्युलेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (1955 ई.), पोएट्रीज़:देयर मीडिया एंड एड्स (1973 ई.) और बियॉन्ड (1974 ई.)।

  1. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित कृतियों का सही अनुक्रम हैं :

(1) दोहाकोष, श्रावकाचार, संदेशरासक, कीर्तिलता  

(2) दोहाकोष, संदेशरासक, श्रावकाचार, कीर्तिलता

(3) संदेशरासक, दोहाकोष, कीर्तिलता, श्रावकाचार

(4) दोहाकोष, श्रावकाचार, कीर्तिलता, संदेशरासक

ANS : (1) दोहाकोष (सातवीं शती), श्रावकाचार (933 ई.), संदेशरासक (11वीं शती), कीर्तिलता (सं.1460)

  1. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित कवियों का सही अनुक्रम हैं :

(1) कुतुबन, उसमान, नूर मुहम्मद, कासिमशाह  

(2) कुतुबनकासिमशाह, नूर मुहम्मद, उसमान

(3) कुतुबन, उसमानकासिमशाह, नूर मुहम्मद 

(4) उसमान, कुतुबनकासिमशाह, नूर मुहम्मद

ANS : (3) कुतुबन, उसमान,  कासिमशाह, नूर मुहम्मद

  1. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित काव्य-कृतियों का सही अनुक्रम हैं :

(1) ललित ललाम, भावविलास, शृंगार निर्णय, जगद् विनोद     

(2) ललित ललाम, शृंगार निर्णय, भावविलास, जगद् विनोद

(3) ललित ललाम, जगद् विनोद, शृंगार निर्णय, भावविलास

(4) भावविलास, ललित ललाम, शृंगार निर्णय, जगद् विनोद

ANS : (1) ललित ललाम, भावविलास, शृंगार निर्णय, जगद् विनोद

  1. जन्मकाल के अनुसार निम्नलिखित कथाकारों का सही अनुक्रम हैं :

(1) जैनेंद्र, भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी

(2) अमृतलाल नागर, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, भगवतीचरण वर्मा, जैनेंद्र,

(3) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, जैनेंद्र, भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर

(4) भगवतीचरण वर्मा, जैनेंद्र, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, अमृतलाल नागर

ANS : (4) भगवतीचरण वर्मा, जैनेंद्र, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, अमृतलाल नागर

  1. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानियों का सही अनुक्रम हैं :

(1) इंदुमती, मक्रील, उसने कहा था, कफन

(2) इंदुमती, उसने कहा था, मक्रील, कफन

(3) इंदुमती, उसने कहा था, कफन, मक्रील

(4) इंदुमती, कफन, उसने कहा था, मक्रील

ANS : (2) इंदुमती, उसने कहा था, मक्रील, कफन

  1. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित पत्रिकाओं का सही अनुक्रम हैं :

(1) नया ज्ञानोदय, सारिका, आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य    

(2) सारिका, आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य, नया ज्ञानोदय

(3) समकालीन भारतीय साहित्य, सारिका, आजकल, नया ज्ञानोदय

(4) आजकल, सारिका, समकालीन भारतीय साहित्य, नया ज्ञानोदय

ANS : (4) आजकल, सारिका, समकालीन भारतीय साहित्य, नया ज्ञानोदय

  1. प्रकाशन काल के आधार पर भीष्म साहनी के नाटकों का सही अनुक्रम हैं :

(1) हानूश, माधवी, मुआवजे, आलमगीर

(2) माधवी, आलमगीर, हानूश, मुआवजे

(3) हानूश, मुआवजे, आलमगीर, माधवी

(4) मुआवजे, हानूश, माधवी, आलमगीर

ANS : (1) हानूश, माधवी, मुआवजे, आलमगीर

  1. प्रकाशन काल की दृष्टि से महिला नाटककारों के नाटकों का सही अनुक्रम हैं :

(1) बिना दिवारों का घर, जो राम रचि राखा, ठहरा हुआ पानी, नेपथ्यराग

(2) बिना दिवारों का घर, ठहरा हुआ पानी, जो राम रचि राखा, नेपथ्यराग

(3) ठहरा हुआ पानी, बिना दिवारों का घर, नेपथ्यराग, जो राम रचि राखा

(4) जो राम रचि राखा, नेपथ्यराग, बिना दिवारों का घर, ठहरा हुआ पानी

ANS : (2) बिना दिवारों का घर, ठहरा हुआ पानी, जो राम रचि राखा, नेपथ्यराग

  1. प्रकाशन वर्ष के आधार पर निम्नलिखित रचनाओं का सही अनुक्रम हैं :

(1) सम्पत्तिशास्त्र, साहित्यलोचन, संस्कृति के चार अध्याय, मघ्यकालीन बोध का स्वरूप

(2) साहित्यलोचन, सम्पत्तिशास्त्र, संस्कृति के चार अध्याय, मघ्यकालीन बोध का स्वरूप

(3) संस्कृति के चार अध्याय, सम्पत्तिशास्त्र, मघ्यकालीन बोध का स्वरूप, साहित्यलोचन

(4) सम्पत्तिशास्त्र, मघ्यकालीन बोध का स्वरूप, साहित्यलोचन, संस्कृति के चार अध्याय

ANS : (1) सम्पत्तिशास्त्र, साहित्यलोचन, संस्कृति के चार अध्याय, मघ्यकालीन बोध का स्वरूप

  1. रचनाकाल के आधार पर निम्नलिखित ग्रंथों का सही अनुक्रम है :

(1) ध्वन्यालोक, काव्यमीमांसा, काव्यादर्श, साहित्य दर्पण

(2) काव्यादर्श, ध्वन्यालोक, काव्यमीमांसा, साहित्य दर्पण

(3) काव्यादर्श, काव्यमीमांसा, ध्वन्यालोक, साहित्य दर्पण

(4) ध्वन्यालोक, काव्यादर्श, साहित्य दर्पण, काव्यमीमांसा

ANS : (2) काव्यादर्श (दण्डी, 7वीं शती का उत्तरार्द्ध), ध्वन्यालोक (आनन्दवर्द्धन, 9वीं शती का मध्यभाग), काव्यमीमांसा राजशेखर, 880-920 के बीच), साहित्य दर्पण (विश्वनाथ,                        14वीं शती)

  1. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I                               सूची-II

(A) हिन्दी साहित्य की भूमिका                 (i) परशुराम चतुर्वेदी

(B) हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास    (ii) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी

(C) उत्तरी भारत की संत परंपरा                (iii) बच्चन सिंह

(D) हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास           (iv) रामकुमार वर्मा   

(v) लक्ष्मी सागर वार्ष्णेय

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (i) (ii) (iv) (v)

(2)   (ii) (iv) (i) (iii)

(3)   (iii) (v) (ii) (iv)

(4)   (v) (i) (iii) (ii)

ANS : (2) हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940 ई., हज़ारीप्रसाद द्विवेदी), हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास (1938 ई., रामकुमार वर्मा), उत्तरी भारत की संत परंपरा (1951 ई., परशुराम चतुर्वेदी), हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास (1996 ई., बच्चन सिंह)

  1. निम्नलिखित संप्रदायों को उनके प्रवर्तकों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I             सूची-II

(A) श्री संप्रदाय            (i) रामानुजाचार्य

(B) रुद्र संप्रदाय           (ii) मध्वाचार्य

(C) सनकादि संप्रदाय       (iii) विष्णु स्वामी

(D) राधा वल्लभी संप्रदाय   (iv) निम्बकाचार्य

                        (v) श्री हितजी

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (ii) (iv) (i) (iii)

(2)   (i) (iii) (iv) (v)

(3)   (iii) (iv) (i) (ii)

(4)   (iv) (i) (ii) (iii)

ANS : (2) श्री संप्रदाय (रामानुजाचार्य, जन्म 1017 ई., तमिलनाडु), रुद्र संप्रदाय (विष्णु स्वामी, जन्म : 13 वीं शती), सनकादि संप्रदाय (निम्बकाचार्य, जन्म : 1590 ई., सनकादि संप्रदाय को निम्बार्क सम्प्रदाय, हंस सम्प्रदाय, कुमार सम्प्रदाय, देवर्षि संप्रदाय और चतुः सन सम्प्रदाय भी कहा जाता है। इस सम्प्रदाय का सिद्धान्त द्वैताद्वैतवादऔर भेदाभेदवादभी कहलाता जाता है। वैष्णवों के चार सम्प्रदायों में यह अत्यन्त प्राचीन सम्प्रदाय है।), राधा वल्लभी संप्रदाय (श्री हितजी, जन्म : 1590 ई.)

  1. निम्नलिखित रचनाकारों को उनकी रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I सूची-II

(A) चिंतामणि (i) अंगदर्पण

(B) मतिराम  (ii) शिवाबावनी

(C) भूषण    (iii) रसरहस्य

(D) रसलीन  (iv) रसराज (v) काव्यप्रकाश

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (ii) (iii) (v) (i)

(2)   (iii) (ii) (i) (iv)

(3)   (iv) (v) (iii) (ii)

(4)   (v) (iv) (ii) (i)

ANS : (4) चिंतामणि (काव्यप्रकाश), मतिराम (रसराज), भूषण (शिवाबावनी)

रसलीन      (अंगदर्पण)

  1. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I            सूची-II

(A) कुमारपाल प्रतिबोध     (i) हेमचंद

(B) प्रबंध चिंतामणि        (ii) जैनाचार्य मेरुतुंग

(C) कुमारपाल चरित्             (iii) सोमप्रभ सूरि

(D) हम्मीर रासो          (iv) जगनिक (v) शारंगधर

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (iii) (ii) (i) (v)

(2)   (ii) (iii) (iv) (i)

(3)   (i) (ii) (iii) (iv)

(4)   (iv) (i) (ii) (v)

ANS : (1) कुमारपाल प्रतिबोध (सं. 1240, सोमप्रभ सूरि) प्रबंध चिंतामणि (सं. 1366, जैनाचार्य मेरुतुंग), कुमारपाल चरित्     (सं. 1216, हेमचंद), हम्मीर (सं. 1357, शारंगधर)

  1. निम्नलिखित संपादकों को उनकी पत्रिकाओं के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I             सूची-II

(A) भारतेंदु हरिश्चंद्र       (i) सरस्वती

(B) प्रेमचंद               (ii) संगम

(C) महावीरप्रसाद द्विवेदी   (iii) प्रतीक

(D) अज्ञेय               (iv) कविवचन सुधा (v) हंस

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (i) (ii) (ii) (iv)

(2)   (ii) (iv) (v) (i)

(3)   (iii) (i) (ii) (v)

(4)   (v) (iv) (ii) (i)

ANS : (4) भारतेंदु हरिश्चंद्र (कविवचन सुधा), प्रेमचंद (हंस), महावीरप्रसाद द्विवेदी (सरस्वती), अज्ञेय (प्रतीक)                 

  1. निम्नलिखित गंर्थों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I                         सूची-II

(A) काव्य और कला तथा अन्य निबंध    (i) रघुवीर सिंह

(B) शेष स्मृतियाँ                      (ii) धीरेन्द्र वर्मा

(C) मेरी जीवनयात्रा                    (iii) जयशंकर प्रसाद

(D) शृंखला की कड़ियाँ                  (iv) राहुल सांकृत्यायन (v) महादेवी वर्मा

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (v) (ii) (ii) (i)

(2)   (ii) (iii) (iv) (i)

(3)   (iii) (i) (iv) (v)

(4)   (iv) (v) (i) (ii)

ANS : (3) (A) काव्य और कला तथा अन्य निबंध (जयशंकर प्रसाद), शेष स्मृतियाँ (रघुवीर सिंह), मेरी जीवनयात्रा (राहुल सांकृत्यायन), शृंखला की कड़ियाँ (महादेवी वर्म)

  1. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I       सूची-II

(A) कर्म का भोग भाग का कर्म   

    यही जड़ का चेतन आनन्द।          (i) निराला

(B) होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन ।

    कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन। (ii) मुक्तिबोध

(C) मौन भी अभिव्यंजना हैः जितना तुम्हारा सच है उतना ही कहो। (iii) जयशंकर प्रसाद

(D) परम अभिव्यक्ति/लगातार धूमती है जग में/पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है।

(iv) अज्ञेय  (v) धमिल

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (ii) (iii) (iv) (v)

(2)   (iii) (i) (iv) (i)

(3)   (i) (iv) (v) (iii)

(4)   (v) (iv) (ii) (i)

(3)   (v) (iii) (ii) (i)

(4)   (v) (i) (iii) (ii)

ANS : (2) कर्म का भोग भाग का कर्म/यही जड़ का चेतन आनन्द। (जयशंकर प्रसाद), होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन/कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन। (निराला), मौन भी अभिव्यंजना हैः जितना तुम्हारा सच है उतना ही कहो। (अज्ञेय), परम भिव्यक्ति/लगातार धूमती है जग में/पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है। (मुक्तिबोध)

  1. निम्नलिखित पात्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I       सूची-II

(A) पर्णदत्त   (i) सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक

(B) हेरूप     (ii) स्कन्द्रगुप्त

(C) ओक्काक       (iii) माधवी

(D) गालव   (iv) कलंकी

            (v) नरसिंह कथा

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (i) (ii) (ii) (iv)

(2)   (ii) (i) (iii) (iv)

(3)   (iv) (iii) (v) (i)

(4)   (ii) (iv) (i) (iii)  

ANS : (4) पर्णदत्त (स्कन्द्रगुप्त), हेरूप (कलंकी), ओक्काक (सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक), गालव (माधवी)

  1. निम्नलिखित एकांकियों को उनके एकांकीकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I             सूची-II

(A) जोंक                      (i) भुवनेश्वर प्रसाद

(B) शिवाजी का सच्चा स्वरूप      (ii) रामकुमार वर्मा

(C) प्रतिभा का विवाह            (iii) उपेन्द्रनाथ अश्क

(D) पृथ्वीराज की आँखें           (iv) हरिकृष्ण प्रेमी (v) सेठ गोविन्ददास

कोड :

      (A) (b) (c) (d))

(1)   (iii) (v) (i) (ii)

(2)   (i) (ii) (iii) (iv)

(3)   (v) (iii) (i) (ii)

(4)   (v) (iv) (ii) (i)

ANS : (1) जोंक (उपेन्द्रनाथ अश्क), शिवाजी का सच्चा स्वरूप (सेठ गोविन्ददास), प्रतिभा का विवाह (भुवनेश्वर प्रसाद), पृथ्वीराज की आँखें (रामकुमार वर्मा)

  1. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I             सूची-II

(A) काव्य में अभिव्यंजनावाद            (i) मिश्रबन्धु

(B) रसपियुषनिधि               (ii) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

(C) रसकलश                         (iii) सोमनाथ

(D) हिन्दी नवरत्न               (iv) लक्ष्मीनारायण   (v) देव

कोड :

      (A) (b) (c) (d)

(1)   (i) (iii) (v) (ii)

(2)   (iii) (i) (iv) (v)

(3)   (iv) (iii) (ii) (i)

(4)   (i) (ii) (iii) (iv)

ANS : (3)   (iv) (iii) (ii) (i) काव्य में अभिव्यंजनावाद (लक्ष्मीनारायण), रसपियुषनिधि  (सोमनाथ), रसकलश (अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध), हिन्दी नवरत्न (मिश्रबन्धु)

निर्देश : प्रश्न संख्या 41 से 45 तक के प्रश्नों के दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (A) और दूसरा तर्क (R) है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

  1. स्थापना (Assertion) (A) : दो विरोधी मूल्यों के बीच भटकना और उससे उत्पन्न तनाव को झेलना ही आधुनिकता की एकमात्रा पहचान है।

तर्क (Reason) (R) : इसलिए आधुनिक नाटककार मोहन राकेश के नाटकों में व्यक्ति-स्वातंत्र्य और चयन की आजादी को महत्व मिला।

कोड :

(1) (A) सही और (R) सही

(2) (A) ग़लत और (R) ग़लत

(3) (A) ग़लत और (R) सही

(4) (A) सही (A) ग़लत

ANS : (3) (A) ग़लत और (R) सही

  1. स्थापना (Assertion) (A) : विभावादि के परिवर्तित स्वरूप के अनुसार रस के आस्वादन में विचित्राता नहीं आती।

तर्क (Reason) (R) : क्योंकि रस स्वयं में विभाव-निरपेक्ष होता है।

कोड :

(1) (A) ग़लत और (R) ग़लत

(2) (A) सही और (R) सही

(3) (A) सही और (R) ग़लत

(4) (A) ग़लत (A) सही

ANS : (1) (A) ग़लत और (R) ग़लत

  1. स्थापना (Assertion) (A) : प्रतिभा के विस्फोट के लिए रसावेश की आवश्यकता है, किन्तु सारे रसिक कवि नहीं बनते।

तर्क (Reason) (R) : राजशेखर ने रचनात्मक प्रतिभा को कारयित्री प्रतिभा कहा है, जो कुछ ही लोगों में होती है।

कोड :

(1) (A) सही और (R) सही

(2) (A) सही और (R) ग़लत

(3) (A) ग़लत और (R) ग़लत

(4) (A) ग़लत (A) सही

ANS : (1) (A) सही और (R) सही

  1. स्थापना (Assertion) (A) : गुण मुख्य :प से रस के धर्म हैं, पर इन्हें गौण :प से शब्दार्थ के धर्म भी माना जाता है।

तर्क (Reason) (R) : क्योंकि गुण का निर्धारण शब्दार्थ से ही होता है।

कोड :

(1) (A) और (R) दोनों सही

(2) (A) और (R) दोनों ग़लत

(3) (A) सही (R) ग़लत

(4) (A) ग़लत (A) सही

ANS : (3) (A) सही (R) ग़लत

  1. स्थापना (Assertion) (A) : कामायनी को :पक काव्य भी कहा जाता है।

तर्क (Reason) (R) : क्योंकि इसमें :पक अलंकार की बहुलता है।

कोड :

(1) (A) सही और (R) सही

(2) (A) सही और (R) ग़लत

(3) (A) ग़लत और (R) सही

(4) (A) ग़लत (R) ग़लत

ANS : (2) (A) सही और (R) ग़लत    

निर्देश : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढिए और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 46-50) के दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अतीत की स्मृति में मनुष्य के लिए स्वाभाविक आकर्षण है। अर्थपरायण लाख कहा करें कि गड़े मुर्दे उखाडझ्ने से क्या फायदापर हृदय नहीं मानता; बार-बार अतीत की ओर जाता है; अपनी यह बुरी आदत नहीं छोडझ्ता। इसमें कुछ रहस्य अवश्य है। हृदय के लिए अतीत एक मुक्ति लोक है जहाँ वह अनेक प्रकार के बंधनों से छूटा रहता है और कुछ शुद्ध :प में विचरता है। वर्तमान हमें अंधा बनाए रहता है, अतीत बीच-बीच में हमारी आँखें खोलता रहता है। मैं तो समझता हूँ कि जीवन का नित्य स्वरूप दिखाने वाला दर्पण मनुष्य के पीछे रहता है; आगे तो बराबर खिसकता हुआ दुर्भेद्य परदा रहता है। बीती बिसारने वाले आगे की सुध रखने का दावाकिया करें, परिणाम अशांति के अतिरिक्त और कुछ नहीं। वर्तमान को संभालने और आगे की सुध रखने का डंका पीटने वाले संसार में जितने ही अधिक होते जाते हैं, संघ-शक्ति के प्रभाव से जीवन की उलझनें उतनी ही बढ़ती जाती हैं। बीता बिसारने का अभिप्राय है जीवन की अखंडता और व्यापकता की अनुभूति का विसर्जन; सहृदयता भावुकता का भंग केवल अर्थ की निष्ठुर क्रीड़ा।

  1. अतीत की स्मृति में मनुष्य के लिए स्वाभाविक आकर्षण है, क्योंकि :

(1) मनुष्य अतीत जीवी होता है।

(2) मनुष्य वर्तमान से भागना चाहता है।

(3) वहाँ मनुष्य अनेक प्रकार के बंधनों से मुक्त रहता है।

(4) मनुष्य अर्थपरायाण नहीं होता है।

ANS : (3) वहाँ मनुष्य अनेक प्रकार के बंधनों से मुक्त रहता है।

  1. वर्तमान हमें अंधा बनाए रहता हैइसका भाव है :

(1) बर्तमान में बहुत-सी समस्याएँ रहती हैं।

(2) हम वर्तमान की समस्याओं में ही उलझे रहते हैं।

(3) हमारी सारी समस्याएँ वर्तमान से संबंद्ध रहती हैं।

(4) हमें वर्तमान से प्रेम होता है।

ANS : (2) हम वर्तमान की समस्याओं में ही उलझे रहते हैं।

  1. अशांति किसका परिणाम है?

(1) वर्तमान से लगाव का।

(2) वर्तमान की उपेक्षा का।

(3) भविष्य की चिंता का।

(4) अतीत की विस्मृति का

ANS : (4) अतीत की विस्मृति का

  1. केवल अर्थ की क्रीड़ा निष्ठुर है, क्योंकि :

(1) वह उलझनों को बढ़ाती है।

(2) वह अतीत की उपेक्षा करती है।

(3) वह वर्तमान की अधिक चिंता करती है।

(4) वह मनुष्य को सहृदय नहीं रहने देती।

ANS : (4) वह मनुष्य को सहृदय नहीं रहने देती।

  1. 50. जीवन का नित्य स्वरूप दिखाने वाला दर्पण क्या है?

(1) अतीत की स्मृति (2) अतीत का सुख

(3) अतीत का दुख   (4) अतीत का मोह

ANS : (1) अतीत की स्मृति

D-2015, HINDI-2 ANS KEY

Home\CBSE NET December 2015 Answer Keys\Answer Key of Hindi CBSE UGC NET December 2015 Exam

Answer Key of Hindi CBSE UGC NET December 2015 Exam

CBSE UGC NET December 2015 Answer Key

Exam: CBSE UGC NET

Date: 27 December 2015

Subject: Hindi

Paper II Answer Key:

Q01) 1, Q02) 1, Q03) 2, Q04) 3, Q05) 2,

Q06) 4, Q07) 2, Q08) 4, Q09) 4, Q10) 3,

Q11) 4, Q12) 2, Q13) 3, Q14) 1, Q15) 1,

Q16) 3, Q17) 3, Q18) 2, Q19) 4, Q20) 3,

Q21) 1, Q22) 3, Q23) 1, Q24) 4, Q25) 2,

Q26) 4, Q27) 1, Q28) 2, Q29) 1, Q30) 2,

Q31) 2, Q32) 2, Q33) 4, Q34) 1, Q35) 4,

Q36) 3, Q37) 2, Q38) 4, Q39) 1, Q40) 3,

Q41) 3, Q42) 1, Q43) 1, Q44) 3, Q45) 2,

Q46) 3, Q47) 2, Q48) 4, Q49) 4, Q50) 1,