स्वामी हरिदास (Swami Haridas : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

स्वामी हरिदास (Swami Haridas : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

स्वामी हरिदास वृंदावन में निंबार्क मतांतर्गत टट्टी संप्रदाय के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत कला कोविद माने जाते थे। कविताकाल संवत् 1600 से 1617 ठहरता है। प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन इनका गुरुवत् सम्मान करते थे। यह प्रसिद्ध है कि अकबर बादशाह साधु के वेश में तानसेन के साथ इनका गाना सुनने के लिए गया था। कहते हैं कि तानसेन इनके सामने गाने लगे और उन्होंने जान बूझकर गाने में कुछ भूल कर दी। इस पर स्वामी हरिदास ने उसी गान को शुद्ध करके गाया। इस युक्ति से अकबर को इनका गाना सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। पीछे अकबर ने बहुत कुछ पूजा चढ़ानी चाही, पर इन्होंने स्वीकृत न की। इनका जन्म संवत् आदि कुछ ज्ञात नहीं, पर इतना निश्चित है कि ये सनाढय ब्राह्मण थे जैसा कि सहचरि सरनदास जी ने, जो इनकी शिष्य परंपरा में थे, लिखा है। वृंदावन से उठकर स्वामी हरिदास जी कुछ दिन निधुवन में रहे थे। इनके पद कठिन राग रागिनियों में गाने योग्य हैं। पढ़ने में कुछ ऊबड़ खाबड़ लगते हैं। पदविन्यास भी और कवियों के समान सर्वत्र मधुर और कोमल नहीं हैं, पर भाव उत्कृष्ट हैं। इनके पदों के तीन चार संग्रह हरिदास जी के ग्रंथ‘, ‘स्वामी हरिदास जी के पद‘ ‘हरिदास जी की बानीआदि नामों से मिलते हैं। एक पद देखिए :

ज्यों ही ज्यों ही तुम राखत हौं, त्यों ही त्यों ही रहियत हौं, हे हरि!

और अपरचै पाय धरौं सुतौं कहौं कौन के पैड भरि।

जदपि हौं अपनो भायो कियो चाहौं, कैसे करि सकौं जो तुम राखौ पकरि।

कहै हरिदास पिंजरा के जनावर लौं तरफराय रह्यौ उड़िबे को कितोऊ करि।

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)

 

प्रश्नोत्तरी-23 (हिंदी भाषा एवं साहित्य)

# स्वामी हरिदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) स्वामी हरिदास वृंदावन में निंबार्क मतांतर्गत टट्टी संप्रदाय के संस्थापक थे।

(B) ‘कृष्ण के अतिरिक्त और पुरुष है कौन जिसके सामने लज्जा करूँ?’

(C) हरिदास जी के ग्रंथ‘, ‘स्वामी हरिदास जी के पद‘ ‘हरिदास जी की बानीआदि स्वामी हरिदास की रचनाएं हैं।

(D) ‘ज्यों ही ज्यों ही तुम राखत हौं, त्यों ही त्यों ही रहियत हौं, हे हरि!

और अपरचै पाय धरौं सुतौं कहौं कौन के पैड भरि। इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार स्वामी हरिदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

# प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन किनका गुरुवत् सम्मान करते थे।

(A) गदाधर भट्ट

(B) मीराबाई

(C) स्वामी हरिदास

(D) परमानंददास

Ans. : (C) स्वामी हरिदास

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)