सूरदास मदनमोहन (Soordas Madanmohan) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

सूरदास मदनमोहन (Soordas Madanmohan) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये अकबर के समय में संडीले के अमीन थे। जाति के ब्राह्मण और गौड़ीय संप्रदाय के वैष्णव थे। ये जो कुछ पास में आता प्राय: सब साधुओं की सेवा में लगा दिया करते थे। कहते हैं कि एक बार संडीले तहसील की मालगुजारी के कई लाख रुपये सरकारी खजाने में आए थे। इन्होंने सबका सब साधुओं को खिला पिला दिया और शाही खजाने में कंकड़ पत्थरों से भरे संदूक भेज दिए जिनके भीतर कागज के चिट यह लिखकर रख दिए :

तेरह लाख सँडीले आए, सब साधुन मिलि गटके।

सूरदास मदनमोहन आधी रातहिं सटके।

और आधी रात को उठकर कहीं भाग गए। बादशाह ने इनका अपराध क्षमा करके इन्हें फिर बुलाया, पर ये विरक्त होकर वृंदावन में रहने लगे। इनकी कविता इतनी सरस होती थी कि इनके बनाए बहुत से पद सूरसागर में मिल गए। इनकी कोई पुस्तक प्रसिद्ध नहीं। कुछ फुटकल पद लोगों के पास मिलते हैं। इनका रचनाकाल संवत् 1590 और 1600 के बीच अनुमान किया जाता है। इनके दो पद नीचे दिए जाते हैं :

मधु के मतवारे स्याम! खोलौ प्यारे पलकैं।

सीस मुकुट लटा छुटी और छुटी अलकै।

सुर नर मुनि द्वार ठाढ़े, दरस हेतु कलकैं।

नासिका के मोती सोहै बीच लाल ललकैं।

कटि पीतांबर मुरली कर श्रवन कुंडल झलकै।

सूरदास मदनमोहन दरस दैहौं भलकै।

 

नवल किसोर नवल नागरिया।

अपनी भुजा स्याम भुज ऊपर, स्याम भुजा अपने उर धरिया।

करत विनोद तरनि तनया तट, स्यामा स्याम उमगि रस भरिया।

यौं लपटाइ रहे उर अंतर मरकत मनि कंचन ज्यों जरिया।

उपमा को घन दामिनी नाहीं, कँदरप कोटि वारने करिया।

सूर मदनमोहन बलि जोरी नंदनंदन बृषभानु दुलरिया।

 

प्रश्नोत्तरी (हिंदी भाषा एवं साहित्य)

# सूरदास मदनमोहन के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) सूरदास मदनमोहन की कविता इतनी सरस होती थी कि इनके बनाए बहुत-से पद सूरसागर में मिल गए।

(B) ‘कृष्ण के अतिरिक्त और पुरुष है कौन जिसके सामने लज्जा करूँ?’

(C) सूरदास मदनमोहन गौड़ीय संप्रदाय के वैष्णव थे।

(D) ‘नवल किसोर नवल नागरिया।

अपनी भुजा स्याम भुज ऊपर, स्याम भुजा अपने उर धरिया।इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार सूरदास मदनमोहन हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

# ‘तेरह लाख सँडीले आए, सब साधुन मिलि गटके।’ यह काव्य-पंक्ति किसने किसको लिखा था?

(A) गदाधर भट्ट ने केशवदास को।

(B) मीराबाई ने गोस्वामी तुलसीदीस को।

(C) स्वामी हरिदास ने कृष्णदास को।

(D) सूरदास मदनमोहन ने बादशाह अकबर को।

Ans. : (D) सूरदास मदनमोहन ने बादशाह अकबर को।

 

#‘मधु के मतवारे स्याम! खोलौ प्यारे पलकैं।

सीस मुकुट लटा छुटी और छुटी अलकै।’

इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(A) परमानंददास

(B) सूरदास

(C) सूरदास मदनमोहन

(D) गदाधर भट्ट

Ans. : (C) सूरदास मदनमोहन

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)