पुहकर कवि (Puhkar kavi : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

पुहकर कवि (Puhkar kavi : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये परतापपुर (जिला मैनपुरी) के रहने वाले थे, पर पीछे गुजरात में सोमनाथ जी के पास भूमिगाँव में रहते थे। ये जाति के कायस्थ थे और जहाँगीर के समय में वर्तमान थे। कहते हैं कि जहाँगीर ने किसी बात पर इन्हें आगरे में कैद कर लिया था। वहीं कारागार में इन्होंने रसरतननामक ग्रंथ संवत् 1673 में लिखा जिस पर प्रसन्न होकर बादशाह ने इन्हें कारागार से मुक्त कर दिया। इस ग्रंथ में रंभावती और सूरसेन की प्रेमकथा कई छंदों में, जिनमें मुख्य दोहा और चौपाई है, प्रबंधकाव्य की साहित्यिक पद्धति पर लिखी गई। कल्पित कथा लेकर प्रबंधकाव्य रचने की प्रथा पुराने हिन्दी कवियों में बहुत कम पाई जाती है। जायसी आदि सूफी शाखा के कवियों ने ही इस प्रकार की पुस्तकें लिखी हैं, पर उनकी परिपाटी बिल्कुल भारतीय नहीं थी। इस दृष्टि से रसरतनको हिन्दी साहित्य में एक विशेष स्थान देना चाहिए।

इसमें संयोग और वियोग की विविध दशाओं का साहित्य की रीति पर वर्णन है। वर्णन उसी ढंग के हैं जिस ढंग के श्रृंगार के मुक्तक कवियों ने किए हैं। पूर्वराग, सखी, मंडन, नखशिख, ऋतुवर्णन आदि श्रृंगार की सब सामग्री एकत्र की गई है। कविता सरस और भाषा प्रौढ़ है। इस कवि के और ग्रंथ नहीं मिले हैं। पर प्राप्त ग्रंथ को देखने से ये एक अच्छे कवि जान पड़ते हैं। इनकी रचना की शैली दिखाने के लिए उद्धृत पद्य पर्याप्त होंगे :

चले मैमता हस्ति झूमंत मत्ता। मनो बद्दला स्याम साथै चलंता।

बनी बागरी रूप राजंत दंता। मनौ बग्ग आसाढ़ पाँतैं उदंता।

लसैं पीत लालैं, सुढालैं ढलक्कैं। मनों चंचला चौंधि छाया छलक्कैं।

 

चंद की उजारी प्यारी नैनन तिहारे, परे

चंद की कला में दुति दूनी दरसाति है।

ललित लतानि में लता सी गहि सुकुमारि

मालती सी फूलैं जब मृदु मुसुकाति है

पुहकर कहै जित देखिए विराजै तित

परम विचित्र चारु चित्र मिलि जाति है।

आवै मन माहि तब रहै मन ही में गड़ि,

नैननि बिलोके बाल नैननि समाति है।

प्रश्नोत्तरी-50 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, पुहकर कवि)

#पुहकर कवि के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) इनका दूषणविचारनाम का एक और ग्रंथ मिला है जिसमें काव्यदोषों का निरूपण है।

(B) पुहकर कवि ने रसरतननामक ग्रंथ में रंभावती और सूरसेन की प्रेमकथा कई छंदों में, जिनमें मुख्य दोहा और चौपाई है, प्रबंधकाव्य की साहित्यिक पद्धति पर लिखी गई।

(C) पुहकर कवि के रसरतनको हिन्दी साहित्य में एक विशेष स्थान देना चाहिए।

(D) ‘‘चंद की उजारी प्यारी नैनन तिहारे, परे

चंद की कला में दुति दूनी दरसाति है।

ललित लतानि में लता सी गहि सुकुमारि

मालती सी फूलैं जब मृदु मुसुकाति है।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार पुहकर कवि हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (B)(b)(c)(d)

#पुहकर कवि के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) आवै मन माहि तब रहै मन ही में गड़ि,

नैननि बिलोके बाल नैननि समाति है। इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार पुहकर कवि हैं।

(B) कारागार में इन्होंने रसरतननामक ग्रंथ संवत् 1673 में लिखा जिस पर प्रसन्न होकर बादशाह जहाँगीर ने इन्हें कारागार से मुक्त कर दिया।

(C) इनका दूषणविचारनाम का एक और ग्रंथ मिला है जिसमें काव्यदोषों का निरूपण है।

(D) ‘‘चंद की उजारी प्यारी नैनन तिहारे, परे

चंद की कला में दुति दूनी दरसाति है।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार पुहकर कवि हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)