मनोहर कवि (Manohar Kavi : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

मनोहर कवि (Manohar Kavi : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये एक कछवाहे सरदार थे जो अकबर के दरबार में रहा करते थे। शिवसिंहसरोज में लिखा है कि ये फ़ारसी और संस्कृत के अच्छे विद्वान थे और फ़ारसी कविता में अपना उपनाम तौसनीरखते थे। इन्होंने शतप्रश्नोत्तारीनाम की पुस्तक बनाई है तथा नीति और श्रृंगाररस के बहुत से फुटकल दोहे कहे हैं। इनका कविताकाल संवत् 1620 के आगे माना जा सकता है। इनके शृंगारिक दोहे मार्मिक और मधुर हैं पर उनमें कुछ फ़ारसीपन के छींटे मौजूद हैं। दो चार नमूने देखिए :

इंदु बदन, नरगिस नयन, संबुलवारे बार।

उर कुंकुम, कोकिल बयन, जेहि लखि लाजत मार।

बिथुरे सुथुरे चीकने घने घने घुघुवार।

रसिकन को जंजीर से बाला तेरे बार।

अचरज मोहिं हिंदू तुरुक बादि करत संग्राम।

इक दीपति सों दीपियत काबा काशीधम।

 

प्रश्नोत्तरी-39 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, मनोहर कवि)

#मनोहर कवि के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) मनोहर कवि फ़ारसी और संस्कृत के अच्छे विद्वान थे और फ़ारसी कविता में अपना उपनाम तौसनीरखते थे।  

(B) मनोहर कवि ने शतप्रश्नोत्तारीनाम की पुस्तक बनाई है।

(C) मनोहर कवि के श्रृंगारिक दोहे मार्मिक और मधुर हैं, पर उनमें कुछ फ़ारसीपन के छींटे मौजूद हैं।

(D) ‘‘ऐसों फलहीन वृच्छ बसुध में भयो, यारो,

सेमर बिसासी बहुतेरन को ठग्यो है।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार मनोहर कवि हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (A)(a)(b)(c)

 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)