#प्रथम रश्मि (#सुमित्रानंदन पंत) #NTA/UCG NET/JRF के पाठ्यक्रम में शामिल

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#प्रथम रश्मि (#सुमित्रानंदन पंत) #NTA/UCG NET/JRF के पाठ्यक्रम में शामिल

#प्रथम रश्मि

#प्रथम रश्मि का आना रंगिणि!

तूने कैसे पहचाना?

कहाँ, कहाँ हे बाल-विहंगिनि!

पाया तूने वह गाना?

सोयी थी तू स्वप्न नीड़ में,

पंखों के सुख में छिपकर,

ऊँघ रहे थे, घूम द्वार पर,

प्रहरी-से जुगनू नाना।

 

शशि-किरणों से उतर-उतरकर,

भू पर कामरूप नभ-चर,

चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,

सिखा रहे थे मुसकाना।

 

स्नेह-हीन तारों के दीपक,

श्वास-शून्य थे तरु के पात,

विचर रहे थे स्वप्न अवनि में

तम ने था मंडप ताना।

#कूक उठी सहसा तरु-वासिनि !

गा तू स्वागत का गाना,

किसने तुझको अंतर्यामिनि !

बतलाया उसका आना !

रचना : 1919 ई.

(वाणी, 1927 ई.)

सूरज की पहली किरण के बारे में कवि छोटी-सी चिड़िया से पूछता है कि वह उसके आगमन को कैसे पहचान गई। यह प्पंरकृति के सुकुमार कवि पंतजी की श्रेष्ठ कविताओं में से एक है।

सूत्रधार कहते हैं कि ‘प्रथम रश्मि’ में कवि सुमित्रानंदन पंत ने एक नन्हीं-सी लड़की को एक नाम दिया— ‘रश्मि’। रश्मि ही ‘प्रथम रश्मि’ की नायिका है। वह अपने बारे में कहती है, ”सौभाग्य मेरा कि मैं कवि पंत की मानस-पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हूँ और मेरा नामकरण स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पंत ने किया।” (साभार सूत्रधार)