जमाल (Jamaal : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

जमाल (Jamaal : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

: ये भारतीय काव्यपरंपरा से पूर्ण परिचित कोई सहृदय मुसलमान कवि थे जिनका रचनाकाल संवत् 1627 अनुमान किया गया है। इनके नीति और श्रृंगार के दोहे राजपूताने की ओर बहुत जनप्रिय हैं। भावों की व्यंजना बहुत ही मार्मिक पर सीधे सादे ढंग पर की गई है। इनका कोई ग्रंथ तो नहीं मिलता, पर कुछ संगृहीत दोहे मिलते हैं। सहृदयता के अतिरिक्त इनमें शब्दक्रीड़ा की निपुणता भी थी, इससे इन्होंने कुछ पहेलियाँ भी अपने दोहों में रखी हैं। कुछ नमूने दिए जाते हैं :

पूनम चाँद, कुसूँभ रँग नदी तीर द्रुम डाल।

रेत भीत, भुस लीपणो ए थिर नहीं जमाल।

रंग ज चोल मजीठ का संत वचन प्रतिपाल।

पाहण रेख रु करम गत ए किमि मिटैं जमाल।

जमला ऐसी प्रीति कर जैसी केस कराय।

कै काला, कै ऊजला जब तब सिर स्यूँ जाय।

मनसा तो गाहक भए नैना भए दलाल।

धनी बसत बेचै नहीं किस बिध बनै जमाल।

बालपणे धौला भया तरुणपणे भया लाल।

वृद्ध पणे काला भया कारण कोण जमाल।

कामिण जावक रँग रच्यो दमकत मुकता कोर।

इम हंसा मोती तजे इम चुग लिए चकोर।

 

प्रश्नोत्तरी-41 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, जमाल)

#जमाल के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) जमाल के नीति और श्रृंगार के दोहे राजपूताने की ओर बहुत जनप्रिय हैं।

(B) जमाल ने कुछ पहेलियाँ भी अपने दोहों में रखी हैं।

(C) जमाल कृत तीन ग्रंथ हैं : बलभद्री व्याकरण, हनुमन्नाटक और गोवर्द्धनसतसई टीका।

(D) ‘‘जमला ऐसी प्रीति कर जैसी केस कराय।

कै काला, कै ऊजला जब तब सिर स्यूँ जाय।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार जमाल हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)