होलराय (Holroy : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र की दृष्टि में

होलराय (Holroy : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र की दृष्टि में

ये ब्रह्मभट्ट अकबर के समय में हरिवंश राय के आश्रित थे और कभी कभी शाही दरबार में भी जाया करते थे। इन्होंने अकबर से कुछ ज़मीन पाई थी जिसमें होलपुर गाँव बसाया था। कहते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन्हें अपना लोटा दिया था जिस पर इन्होंने कहा था :

लोटा तुलसीदास को लाख टका को मोल।

गोस्वामी जी ने चट उत्तर दिया,

मोल तोल कछु है नहीं, लेहु राय कवि होल।

रचना इनकी पुष्ट होती थी पर जान पड़ता है कि ये केवल राजाओं और रईसों की विरुदावली वर्णन किया करते थे जिसमें जनता के लिए ऐसा कोई विशेष आकर्षण नहीं था कि इनकी रचना सुरक्षित रहती। अकबर बादशाह की प्रशंसा में इन्होंने यह कवित्त लिखा है :

दिल्ली तें न तख्त ह्वैहै, बख्त ना मुगल कैसो,

ह्वैहै ना नगर बढ़ि आगरा नगर तें।

गंग तें न गुनी, तानसेन तें न तानबाज,

मान तें न राजा औ न दाता बीरबरतें

खान खानखाना तें न, नर नरहरि तें न,

ह्वैहै ना दीवान कोऊ बेडर टुडर तें।

नवौ खंड सात दीप; सात हू समुद्र पार,

ह्वैहै ना जलालुदीन साह अकबर तें।

प्रश्नोत्तरी-44 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, होलराय)

#होलराय के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) ये ब्रह्मभट्ट अकबर के समय में हरिवंश राय के आश्रित थे और कभी कभी शाही दरबार में भी जाया करते थे।

(B) ये केवल राजाओं और रईसों की विरुदावली वर्णन किया करते थे जिसमें जनता के लिए ऐसा कोई विशेष आकर्षण नहीं था।

(C) होलराय कृत तीन ग्रंथ हैं : बलभद्री व्याकरण, हनुमन्नाटक और गोवर्द्धनसतसई टीका।

(D) ‘‘नवौ खंड सात दीप; सात हू समुद्र पार,

ह्वैहै ना जलालुदीन साह अकबर तें।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार होलराय हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)