आलम (Alam : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

आलम (Alam : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये अकबर के समय के एक मुसलमान कवि थे जिन्होंने सन् 991 हिजरी अर्थात् संवत् 1639-40 में माधवानल कामकंदलानाम की प्रेमकहानी दोहा चौपाई में लिखी। पाँच पाँच चौपाइयों (अर्धालियों) पर एक एक दोहा या सोरठा है। यह श्रृंगार रस की दृष्टि से ही लिखी जान पड़ती है, आध्यात्मिक दृष्टि से नहीं। इसमें जो कुछ रुचिरता है वह कहानी की है, वस्तुवर्णन, भाव व्यंजना आदि की नहीं। कहानी भी प्राकृत या अपभ्रंश से चली आती हुई कहानी है।

कवि ने रचनाकाल का उल्लेख इस प्रकार किया है :

दिल्लीपति अकबर सुरताना । सप्तदीप में जाकी आना।।

धरमराज सब देस चलावा । हिंदू-तुरुक पंथ सब लावा।।

×××

सन नौ सै इक्कानबे आही। करौं कथा औ बोलौं ताही।

प्रश्नोत्तरी-35 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, आलम)

#आलम के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) आलम ने माधवानल कामकंदलानाम की प्रेमकहानी दोहा चौपाई में लिखी।

(B) ‘हिततरंगिणीका निर्माण बिहारी सतसईसे पहले हुआ है।

(C) ‘माधवानल कामकंदला श्रृंगार रस की दृष्टि से ही लिखी जान पड़ती है, आध्यात्मिक दृष्टि से नहीं।

(D) ‘‘दिल्लीपति अकबर सुरताना । सप्तदीप में जाकी आना।।

धरमराज सब देस चलावा । हिंदू-तुरुक पंथ सब लावा।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार आलम हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)