नरोत्तमदास (Narottamdas : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये सीतापुर जिले के वाड़ी नामक कस्बे के रहनेवाले थे। शिवसिंहसरोज में इनका संवत् 1602 में वर्तमान रहना लिखा है। इनकी जाति का उल्लेख कहीं नहीं मिलता। इनका सुदामाचरित्रग्रंथ बहुत प्रसिद्ध है। इसमें घर की दरिद्रता का बहुत ही सुंदर वर्णन है। यद्यपि यह छोटा है, तथापि इसकी रचना बहुत ही सरस और हृदयग्राहिणी है और कवि की भावुकता का परिचय देती है। भाषा भी बहुत ही परिमार्जित और व्यवस्थित है। बहुतेरे कवियों के समान भरती के शब्द और वाक्य इसमें नहीं हैं। कुछ लोगों के अनुसार इन्होंने इसी प्रकार का एक और खंडकाव्य ध्रुवचरितभी लिखा है। पर वह कहीं देखने में नहीं आया। सुदामाचरितका यह सवैया बहुत लोगों के मुँह से सुनाई पड़ता है :

सीस पगा न झगा तन पै, प्रभु! जानै को आहि बसै केहि ग्रामा।

धोती फटी सी, लटी दुपटी अरु पाँय उपानह को नहीं सामा।

द्वार खड़ो द्विज दुर्बल एक, रह्यो चकि सो बसुध अभिरामा।

पूछत दीनदयाल को धम, बतावत आपनो नाम सुदामा।

कृष्ण की दीनवत्सलता और करुणा का एक यह और सवैया देखिए :

कैसे बिहाल बिवाइन सों भए, कंटक जाल गड़े पग जोए।

हाय महादुख पाए सखा! तुम आए इतै न, कितै दिन खोए।

देखि सुदामा की दीन दसा करुना करिकै करुनानिधि रोए।

पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए।

 

प्रश्नोत्तरी (हिंदी भाषा एवं साहित्य, नरोत्तमदास)

#नरोत्तमदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) इनका सुदामाचरित्रग्रंथ बहुत प्रसिद्ध है। इसमें घर की दरिद्रता का बहुत ही सुंदर वर्णन है।

(B) भाषा भी बहुत ही परिमार्जित और व्यवस्थित है।

(C) ‘दशम स्कंध भाषा’ का अनुवाद फ़ारसी भाषा में नहीं हुआ है।

(D) ‘‘देखि सुदामा की दीन दसा करुना करिकै करुनानिधि रोए।

पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए।’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार नरोत्तमदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

 

#नरोत्तमदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) नरोत्तमदास ने एक खंडकाव्य ध्रुवचरितभी लिखा है।

(B) हिततरंगिणी के दोहे बहुत ही सरस, भावपूर्ण तथा परिमार्जित भाषा में हैं।

(C) सुदामाचरित्र की रचना बहुत ही सरस और हृदयग्राहिणी है और कवि की भावुकता का परिचय देती है।

(D) ‘‘द्वार खड़ो द्विज दुर्बल एक, रह्यो चकि सो बसुध अभिरामा।

पूछत दीनदयाल को धम, बतावत आपनो नाम सुदामा।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार नरोत्तमदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)