लालचदास (Lalachdas : the Hindi poet) :  आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

लालचदास (Lalachdas : the Hindi poet) :  आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

लालचदास : ये रायबरेली के एक हलवाई थे। इन्होंने संवत् 1585 में हरिचरितऔर संवत् 1587 में भागवत दशम स्कंध भाषानाम की पुस्तक अवधी मिली भाषा में बनाई। ये दोनों पुस्तकें काव्य की दृष्टि से सामान्य श्रेणी की हैं और दोहे चौपाइयों में लिखी गई हैं। दशम स्कंध भाषाका उल्लेख हिंदुस्तानी के फ़ारसी विद्वान गार्सां द तासी ने किया है और लिखा है कि उसका अनुवाद फ़ारसी भाषा में हुआ है। भागवत भाषाइस प्रकार की चौपाइयों में लिखी गई है :

पंद्रह सौ सत्तासी जहिया । समय बिलंबित बरनौं तहिया।।

मास असाढ़ कथा अनुसारी । हरिबासर रजनी उजियारी।।

सकल संत कहँ नावौं माथा । बलि बलि जैहौं जादवनाथा।।

रायबरेली बरनि अवासा । लालच रामनाम कै आसा।।

प्रश्नोत्तरी-31 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, लालचदास)

# लालचदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) इन्होंने संवत् 1585 में हरिचरितऔर संवत् 1587 में भागवत दशम स्कंध भाषानाम की पुस्तक अवधी मिली भाषा में बनाई और दोहे चौपाइयों में लिखी गई हैं।

(B) इनकी लिखी एक बावनीभी है जिसमें 52 दोहे हैं।

(C) लालचदास की पुस्तक ‘दशम स्कंध भाषा’ का अनुवाद फ़ारसी भाषा में हुआ है।

(D) ‘‘सकल संत कहँ नावौं माथा । बलि बलि जैहौं जादवनाथा।।

रायबरेली बरनि अवासा । लालच रामनाम कै आसा।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार लालचदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)