श्रीभट्ट (Shri Bhatta : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

श्रीभट्ट (Shri Bhatta : the Hindi poet) : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

ये निंबार्क संप्रदाय के प्रसिद्ध विद्वान केशव कश्मीरी के प्रधान शिष्य थे। इनका जन्म संवत् 1595 में अनुमान किया जाता है अत: इनका कविताकाल संवत् 1625 या उसके कुछ आगे तक माना जा सकता है। इनकी कविता सीधी सादी और चलती भाषा में है। पद भी प्राय: छोटे छोटे हैं। इनकी कृति भी अधिक विस्तृत नहीं है पर युगल शतकनाम का इनका 100 पदों का एक ग्रंथ कृष्णभक्तों में बहुत आदर की दृष्टि से देखा जाता है। युगल शतकके अतिरिक्त इनकी एक छोटी सी पुस्तक आदि वाणीभी मिलती है। ऐसा प्रसिद्ध है कि जब ये तन्मय होकर अपने पद गाने लगते थे तब कभी कभी उस पद के ध्यानानुरूप इन्हें भगवान की झलक प्रत्यक्ष मिल जाती थी। एक बार वे यह मलार गा रहे थे :

भीजत कब देखौं इन नैना।

स्यामाजू की सुरँग चूनरी, मोहन को उपरैना।

कहते हैं कि राधाकृष्ण इसी रूप में इन्हें दिखाई पड़ गए और इन्होंने पद इस प्रकार पूरा किया :

स्यामा स्याम कुंजतर ठाढ़े, जतन कियो कछु मैं ना।

श्रीभट उमड़ि घटा चहुँ दिसि से घिरि आई जल सेना

इनके युगल शतकसे दो पद उद्धृत किए जाते हैं :

ब्रजभूमि मोहनि मैं जानी।

मोहन कुंज, मोहन वृंदावन, मोहन जमुना पानी।

मोहन नारि सकल गोकुल की बोलति अमरित बानी।

श्रीभट्ट के प्रभु मोहन नागर, ‘मोहनि राध रानी

 

बसौ मेरे नैननि में दोउ चंद।

गोर बदनि बृषभानु नंदिनी, स्यामबरन नँदनंद।

गोलक रहे लुभाय रूप में निरखत आनंदकंद।

जय श्रीभट्ट प्रेमरस बंधन, क्यों छूटै दृढ़ फंद।

 

प्रश्नोत्तरी-25 (हिंदी भाषा एवं साहित्य)

#श्रीभट्ट के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) श्रीभट्ट की कविता सीधी-सादी और चलती भाषा में है। पद भी प्राय: छोटे-छोटे हैं।

(B) श्रीभट्ट निंबार्क संप्रदाय के प्रसिद्ध विद्वान केशव कश्मीरी के प्रधान शिष्य थे।

(C) श्रीभट्ट गौड़ीय संप्रदाय के वैष्णव थे।

(D) ‘बसौ मेरे नैननि में दोउ चंद।

गोर बदनि बृषभानु नंदिनी, स्यामबरन नँदनंद।इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार श्रीभट्ट हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

#‘भीजत कब देखौं इन नैना।

स्यामाजू की सुरँग चूनरी, मोहन को उपरैना।’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(A) श्रीभट्ट

(B) मीराबाई

(C) स्वामी हरिदास

(D) सूरदास मदनमोहन

Ans. : (A) श्रीभट्ट

#’युगल शतक’ और ‘आदि वाणी’ किनकी रचनाएं हैं :

(A) परमानंददास

(B) सूरदास

(C) सूरदास मदनमोहन

(D) श्रीभट्ट

Ans. : (D) श्रीभट्ट

#‘ब्रजभूमि मोहनि मैं जानी।

मोहन कुंज, मोहन वृंदावन, मोहन जमुना पानी।’

इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(A) परमानंददास

(B) सूरदास

(C) श्रीभट्ट

(D) गदाधर भट्ट

Ans. : (C) श्रीभट्ट

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)