#सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन #अज्ञेय की सभी रचनाएं

#सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन #अज्ञेय की सभी रचनाएं

(जन्म : 7 मार्च, 1911 कुशीनगर, देवरिया, उ. प्र. – मृत्यु : 4 अप्रैल, 1987 नई दिल्ली)

#नाम : #सच्चिदानंद वात्स्यायन

#बचपन का नाम : #सच्चा

#ललित निबंधकार नाम  : #कुट्रिटचातन

रचनाकार नाम : #अज्ञेय (#जैनेद्र और #प्रेमचंद का दिया नाम है)।

#अज्ञेय #प्रयोगवाद एवं #नई कविता को साहित्य-जगत् में #प्रतिष्ठित करने वाले कवि, प्रयोगधर्मी साहित्यकार। अज्ञेय के विषय में यह कहा जाता है कि, वह #’कठिन काव्य के प्रेत हैं’।

#पहला कहानी :# जिज्ञासा (1935, ई.)

#पहला कहानी-संग्रह :  विपथगा (1932 ई.)

#अंतिम कहानी हज़ामत का साबुन (1959)

#अधूरी कहानी : गृहत्याग (1932 ई., विपथगा में संकलित)

रचनाएँ

उपन्यास

  1. #शेखर : एक जीवनी खंड-1 (1941, पात्र : शेखर, सरस्वती, शशि, शारदा, शांति) सस्वती प्रेस, बनारस
  2. #शेखर : एक जीवनी खंड-2 (1944), सस्वती प्रेस, बनारस
  3. #नदी के द्वीप (1951, पात्र : रेखा, गौरा, डॉ. भुवन, चंद्रमाधव)
  4. #अपने–अपने अजनबी (1979 पात्र : योके, सेल्मा, पॉल सोरेन, यान, जगन्नाथन), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी
  5. #बारह खंभा (संयुक्त कृति), दस अन्य लेखकों के संग एक प्रयोग प्रभात प्रकाशन
  6. #छाया मेंखल, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली
  7. #बीनू भगत, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली

कविता-संग्रह

  1. #भग्नदूत (1933), वी.एच. वात्स्यायन, लाहौर
  2. #चिंता (1942), सस्वती प्रेस, बनारस
  3. #इत्यलम् (1946, ), प्रगति प्रकाशन, दिल्ली
  4. #हरी घास पर क्षण भर (1949), प्रगति प्रकाशन, दिल्ली
  5. #बावरा अहेरी (1954), भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली
  6. #इंद्रधनु रौंदे हुए ये (1957), सरस्वती प्रेस, दिल्ली
  7. #अरी ओ करुणा प्रभामय (1951), भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली
  8. #पुष्करिणी (1959), साहित्य सदन, झाँसी
  9. #आँगन के पार द्वार (1961, आंगन के पार द्वार काव्य-संग्रह तीन खंडों में विभक्त है : प्रथम अंतःसलीला‘, द्वितीय चंद्रकांतशीला और असाध्य वीणाआंगन के पार द्वार में संकलित असाध्य वीणा (लंबी कविता) अज्ञेय की श्रेष्ठतम कविताओं में गिनी जाती है। असाध्य वीणा चीनी लोककथा टेमिंग ऑफ द हार्प की भारतीय परिवेश में प्रस्तुति है। आंगन के पार द्वार में अज्ञेय ने विराट जीवन और अनिर्वचनीय तत्व के साथ अपने मन का संबंध स्थापित किया है। आंगन के पार द्वार पर 1962 ई. में अज्ञेय ज5 को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।)
  10. #पूर्वा (भग्नदूत, इत्यलम्, हरि घास पर क्षण भर का संकलन, 1965) राजपाल एंड संज
  11. #सुनहरे शैवाल (1966), अक्षर प्रकाशन, नयी दिल्ली
  12. #कितनी नावों में कितनी बार (1967, इस पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 1978 ई. प्राप्त हुआ), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी
  13. #क्योंकि मैं उसे जानता हूँ (1969), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी
  14. #सागर मुद्रा (1970), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  15. #पहले मै सन्नाटा बुनता हूँ (1974), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  16. #महावृक्ष के नीचे (1977), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  17. #नदी की बाँक पर छाया (1981), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  18. #सदानीरा (दो खंडो में, 1984), नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली
  19. #ऐसा कोई घर आपने देखा है (1986), नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली
  20. #मरुस्थल (1995), प्रभात प्रकाशन, दिल्ली
  21. #कारावास के दिन तथा अन्‍य कविताएं / अज्ञेय (अज्ञेय की अंग्रेजी कविताओं का अनुवाद)

लंबी कविता

#असाध्य वीणा (1961ई.)

चुनी हुई रचनाओं के संग्रह

#पूर्वा (अज्ञेय, कविता संग्रह, 1965)

#सुनहरे शैवाल / अज्ञेय (कविता संग्रह, 1965)

#अज्ञेय काव्य स्तबक (अज्ञेय (कविता संग्रह, 1995)

#सन्नाटे का छन्द (अज्ञेय (कविता संग्रह)

#सप्तक-श्रृंखला

  1. #तार सप्तक (1943), द्वितीय परिवर्द्धित संस्करण (1963)

(कवि : मुक्तिबोध, नेमिचंद्र जैन, भारतभूषण अग्रवाल, प्रभाकर माचवे, गिरिजाकुमार माथुर, रामविलास शर्मा, अज्ञेय)    स्मरण-सूत्र : मुनेभाप्रगिराअ

  1. #दूसरा सप्तक (1951), प्रगति प्रकाशन, दिल्ली

(कवि : भवानीप्रसाद मिश्र, शंकुतला माथुर, हरिनारायण व्यास, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती)  स्मरण-सूत्र : भशंहशनरध

  1. #तीसरा सप्तक (1959), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी

(कवि : प्रयागनारायण त्रिपाठी, कीर्ति चौधरी, मदन वात्स्यायन, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, विजयदेव नारायण साही, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना) स्मरण-सूत्र : प्रकीमकेकुंविस

  1. #चौथा सप्तक (1979), सरस्वती विहार, दिल्ली

(कवि : अवधेश कुमार, राजकुमार कुंभज, स्वदेश भारती, नंद किशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम शर्मा, राजेन्द्र किशोर)        स्मरण-सूत्र : अरास्नंसुश्रीरा

नाटक

  1. #उत्तर प्रियदर्शी (1967), अक्षर प्रकाशन दिल्ली

कहानी-संग्रह

  1. #विपथगा (1937), भारतीय भड़ार, लीडर प्रेस इलहाबाद
  2. #परंपरा (1944), सस्वती प्रेस, बनारस
  3. #अमर वल्लरी और अन्य कहानियाँ, सस्वती प्रेस, बनारस
  4. #कड़ियाँ तथा अन्य कहानियाँ, सस्वती प्रेस, बनारस
  5. #कठोरी की बात (1945), प्रतीक प्रकाशन, दिल्ली
  6. #शरणार्थी (1948), शारदा प्रकाशन, बनारस
  7. #जयदोल (1951) प्रतीक प्रकाशन, दिल्ली
  8. #ये तेरे प्रतिरूप (1961), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  9. जिज्ञासा एवं अन्य कहनियाँ (1965 ई.)
  10. #संपूर्ण कहानियाँ (दो खंडों में, 1975), राजपाल एंड संज, दिल्ली

मशहूर कहानियां

विपथगा (वार्तालाप-शैली), कविप्रिया (वार्तालाप-शैली में), सांप, धीरज और पठार का धीरज (तीनों प्रतीकात्मक शैली में), हीली बोन की बत्तखें, मेजर चौधुरी की वापसी (दोनों मनोविश्लेषण-प्रधान शैली में), देवी (व्यंग्यप्रधान-शैली में), खित्तीन बाबू (रेखाचित्र या संस्मरण शैली), पगोडा वृक्ष, अकलंक, कड़िया, पुलिस की सीटी (नाटकीय शैली), द्रोही, मनसो, अमरबल्लारी (आत्मकथात्मक शैली), शरणदाता, मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई, बदला, रमंते तत्र देवता, नारंगियां (देश-विभाजन-संबंधी कहानियां)  गैंग्रीन (रोज़), हारीति, छाया, क्षमा, दारोगा अमीचंद, अलिखित कहानी, शांति हंसी थी, शत्रु, पुरुष का भाग्य, कोठरी की बात, सिगनेलर, पुलिस की सीटी, चिड़ियाघर, पठार का धीरज इत्यादि अज्ञेय की मशहूर कहानियां हं।

यात्रा-वृत्तान्त

  1. #अरे यायवर रहेगा याद (1953) सस्वती प्रेस, बनारस
  2. #एक बूँद सहसा उछली (1960) भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली
  3. #बहता पानी निर्मल

डायरी

  1. #भवंती (1972, 1964-70), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  2. #अतंरा (1970, 1970-74), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  3. #शाश्वती (1979, 1975-79), राजपाल एंड संज, दिल्ली
  4. #शेष (1995), प्रभात प्रकाशन, दिल्ली

निबंध/गद्य

  1. #त्रिशंकु (1945), सस्वती प्रेस, बनारस
  2. #सबरंग (1964)
  3. #आत्मनेपद (1960), भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली
  4. #हिंदी साहित्यः एक आधुनिक परिदृश्य (1967), अभिनव भारती ग्रथमाला, कलकत्ता
  5. #सबरंग और कुछ राग (1969)
  6. #आलवाल (1971) राजकमल, दिल्ली
  7. #लिखि कागद कोरे (1972) राजपाल एंड संज दिल्ली
  8. भवंती (1972)
  9. अंतरा (1975)
  10. #अद्यतन (1977), सरस्वती विहार, दिल्ली
  11. #जोग लिखी (1977), राजपाल एंड संज दिल्ली
  12. #संवत्सर (1978), नेशनल परिब्लिशिग हाउस, दिल्ली
  13. #स्त्रोत और सेतु (1978), राजपाल एंड संज दिल्ली
  14. #व्यक्ति और व्यवस्था (1979), नेशनल परिब्लिशिग हाउस, दिल्ली
  15. #अपरोक्ष (1979), सरस्वती विहार, दिल्ली
  16. #युग संधियों पर (1981), सरस्वती विहार, दिल्ली
  17. #धारा और किनारे (1982), सरस्वती विहार, दिल्ली
  18. #स्मृति लेखा (1982), नेशनल परिब्लिशिग हाउस, दिल्ली
  19. #कहाँ है द्वारका (1982), राजपाल एंड संज दिल्ली
  20. #आत्मपरक (1983), नेशनल परिब्लिशिग हाउस, दिल्ली
  21. कवि दृष्टि (1983)
  22. #छाया और जंगल (1984), सरस्वती विहार, दिल्ली
  23. केंद्र और परिधि (1984)
  24. सर्जना और संदर्भ (1985)
  25. स्मृति के परिदृश्य (1987)
  26. #स्मृतिछंदा (1989), नेशनल परिब्लिशिग हाउस, दिल्ली

अनुवाद

  1. अंग्रेजी ‘#विजिर’, स एलीफेट (इवो आंद्रिक) से ‘वजीर का फीता’,
  2. अंग्रेजी ‘#विवेकानंद’ (रोमांरोला) से हिंदी ‘विवेकानंद’,
  3. हिंदी ‘#त्यागपत्र’, (जैनेद्र कुमार) से अंग्रेजी ‘द रेजिग्नेशन’ (1946)
  4. बांग्ला #‘गोरा’,( रवींद्रनाथ ठाकुर) से हिंदी ‘गोरा’,
  5. #बांग्ला #‘राजा’, (रवीद्रनाथ ठाकुर) से हिंदी ‘राजा’,
  6. #लागरक्विस्त के तीन उपन्यासों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद
  7. #बाग्ला ‘श्रीकांत’, (शरतचंद्र चट्रटोपाध्याय) से हिंदी, ‘श्रीकांत’
  8. #लिंकन वाणी (1951)

संपादित ग्रंथ

  1. #आधुनिक हिंदी साहित्य (1940), मेरठ साहित्य-संस्थान
  2. #पुष्करिणी (1959), साहित्य-सदन, झाँसी
  3. #नये एकांकी (1952), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी
  4. #नेहरु अभिनंदन ग्रंथ (संयुक्त रूप से,1999)
  5. #रुपांबरा (हिंदी प्रकृति काव्य-संकलन, 1960),
  6. #सर्जन और संप्रेषण (वत्सल निधि ले. शिविर, लखनऊ, ने. प. हाऊस, न. दिल्ली,1985)
  7. #साहित्य का परिवेश (व. निधि लेखन शिविर, आबू, ने. प. हाऊस, नयी दिल्ली,1985)
  8. #साहित्य और समाज परिवर्तन (वत्सल निधि लेखक शिविर, बरगी नगर, नेशनल पब्लिशिंग हाऊस, नयी दिल्ली,1986)
  9. #समकालीन कविता में छंद (वत्सल निधि लेखन शिविर, बोधगया, नेशनल पब्शिंग हाऊस, नयी दिल्ली,1987)
  10. #स्मृति के परिदृश्य (संवत्सर व्याख्यानमाला, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली,1987)
  11. #भविष्य और साहित्य (वत्सल निधि लेखन शिविर, जम्मू, ने. प. हाउस, नई दिल्ली,1989)
  12. #होमवती स्मारक ग्रंथ नये साहित्य-सृष्टा, ग्रंथमाला (भारतीय ज्ञानपीठ) में रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, अजित कुमार, शांति मेहरोत्रा के रचना-संकलन
  13. #भारतीय कला-दृष्टि, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली
  14. #जन जनक जानकी, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली
  15. #सामाजिकक-यथार्थ और कला-भाषा (1986)

पत्रकारिता

1936        : #कुछ दिनों तक आगरा के समाचार पत्र सैनिक के संपादन मंडल में

1937-39     : #विशाल भारत के संपादकीय विभाग में, कुछ दिन ऑल इंडिया रेडियो में

1946        : #प्रतीक का संपादन

1965-1968 : #साप्ताहिक दिनमान का संपादन

1973        : #प्रतीक को नाम, #नया प्रतीक देकर निकाला

1977        : #दैनिक पत्र #नवभारत टाइम्स का संपादन

#1964 में #आँगन के पार द्वार पर #साहित्य अकादमी पुरस्कार और #1979 में #कितनी नावों में कितनी बार पर #भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।

कथन/काव्य-पंक्तियां

#वाद के रूप में प्रयोग शब्द का प्रचलन सन 1943 अज्ञेय द्वारा संपादित तार सप्तक के माना जाता है।

#समकालीन आलोचकों ने अज्ञेय को अस्तित्ववादी ने कहा है।

#अज्ञेय ने तारसप्तक के कवियों को राहों का अन्वेषी कहा है।

#अज्ञेय ने प्रयोगवाद शब्द को अनुपयुक्त मानते हुए दूसरा सप्तक की भूमिका में स्पष्ट किया है कि प्रयोग का कोई बाद नहीं है। विरोध और अस्वीकृति के बाद भी प्रयोगवाद शब्द सर्वमान्य हो गया है।

#प्रयोगवाद की काल-अवधि सन 1943 से 1953 तक मानी जाती है।

#सन 1952 में नई कविता शब्द का प्रयोग अज्ञेय ने आकाशवाणी पटना की एक भेंटवार्ता में किया था।

#प्रयोगवाद का सर्वप्रथम प्रयोग नंददुलारे बाजपेयी द्वारा (प्रयोगवादी रचनाएं शीर्षक आलेख में) किया गया था।

#प्रयोगवाद का आरंभ तारसप्तक प्रथम (1943 ई.) के प्रकाशन के साथ हुआ।

#प्रयोगवाद फ़्रायड-दर्शन से प्रभावित है।

#प्रयोगवादी कवि किसी एक स्कूल के नहीं हैं, सभी रही हैं, राही नहीं, राह के अन्वेषी हैं। (अज्ञेय तारसप्तक की भूमिका में)

#प्रयोगवाद का कोई वाद नहीं है, हम वादी नहीं रहे, नहीं हैं। न प्रयोग अपने आप में इष्ट या साध्य है। इस तरह कविता का कोई बाद नहीं। (अज्ञेय, दूसरा सप्तक की भूमिका में)

#प्रयोगशील कवि मोती खोजने वाले गोताखोर हैं। (अज्ञेय)

#हमें प्रयोगवादी कहना उतना ही ग़लत है, जितना कहना कवितावादी। (अज्ञेय)

#प्रयोगवाद बैठे ठाले का धंधा है। (नंददुलारे बाजपेयी)

#चरम व्यक्तिवाद ही प्रयोगवाद का केंद्र बिंदु है। (नामवर सिंह)

#जिस प्रकार संदेह एक हद के बाद संदेहवाद हो जाता है, उसी प्रकार प्रयोग भी एक हद के बाद प्रयोगवाद। (नामवर सिंह)

#मैं प्रयोगवाद का अगुआ नहीं, पिछलगुआ हूं। (दिनकर)

#प्रयोगवाद दृष्टिकोण का अनुसंधान है। (केसरी कुमार)

#प्रयोगवाद शैलीगत विद्रोह है। (डॉ. नगेंद्र)

#प्रयोगवाद कलात्मक अनुभव का क्षण है। (रघुवीर सहाय)

#काव्य के प्रति एक अन्वेषी का दृष्टिकोण ही उन्हें (तारसप्तक के कवियों को) समानता के सूत्र में बांधता है। (अज्ञेय)

#प्रयोगवाद कोरे रूपवाद से अधिक व्यापक प्रवृत्ति तथा विचारधारा का वाहक है। (नामवर सिंह)

#प्रयोगवाद एक ओर व्यक्ति की अनुभूति को समष्टि अनुभूति तक उत्सर्ग करने का प्रयास है, तो दूसरी ओर रूढ़ि का वह विरोधी और अन्वेषण का समर्थक है। (लक्ष्मीकांत वर्मा)

#प्रयोगवादी कविता में भावना है किंतु हर भावना के सामने एक प्रश्न चिह्न लगा हुआ है। (धर्मवीर भारती)

#प्रयोगवादी काव्य जहां अपने शैली तथा रूप-विधान में अतिव्यक्तिक हो जाता है, वहीं अपनी भावना में जनवादी।….. यह नवीन का काव्य प्रभाववादी है। (सुमित्रानंदन पंत)

#प्रयोगवाद के शलाका पुरुष अज्ञेय दूसरे सप्तक की भूमिका में प्रयोगवाद का विरोध किया था। प्रयोगवाद का सबसे ज़्यादादा विरोध करने वाले अज्ञेय ही थे।

#प्रयोगवाद को मुन्नी, युवती और बहू की संज्ञा गणपतिचंद्र गुप्त ने दी थी।

#घासलेटी साहित्य का प्रवर्तन प्रयोगवाद के नाम से किया गया है। (गोविंद त्रिगुणायत)

#अज्ञेय को परंपराभंजक कहा जाता है। शब्दों के बावरा अहेरी के रूप में अज्ञेय प्रसिद्ध है। हजारीप्रसाद द्विवेदी ने बीसवीं सदी का बाणभट्ट कहा है।

#प्रयोगशील कविता में नए सत्यों, कई यथार्थताओं का जीवित बोध भी है, उनके सत्यों के साथ नए रागात्मक संबंध भी और उनको पाठक या सहृदय तक पहुंचाने यानी साधारणीकरण की शक्ति है। (अज्ञेय)

#हम हैं द्वीप, हम धरा नहीं, हम बहते नहीं हैं, क्योंकि बहना रेत होना है।

#मौन भी अभिव्यंजना है। जितना तुम्हारा सच है, उतना ही कहो।

#ये उपमान मैले हो गए हैं।

#देवता इन प्रतीकों से कर गए हैं कूच।

#कभी वासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है।

#दुख सबको मांजता है।

#मैं ही हूं वह पदाक्रांत रिरियाता कुत्ता।

#एक क्षण क्षण में प्रवहमान व्याप्त संपूर्णता वंचना है चांदनी सित।

#उड़ चल हारिल, लिए हाथ में यही अकेला ओछा तिनका।

कविताएँ

#अनुभव-परिपक्व (अज्ञेय)

#अरे ! ऋतुराज आ गया !! (अज्ञेय)

#अलाव (अज्ञेय)

#आंगन के पार द्वार खुले (अज्ञेय)

#उड़ चल हारिल (अज्ञेय)

#उधार (अज्ञेय)

#उषा-दर्शन (अज्ञेय)

#औद्योगिक बस्ती (अज्ञेय)

#कतकी पूनो (अज्ञेय)

# कदम्ब-कालिन्दी-1-2 (अज्ञेय)

#कलगी बाजरे की (अज्ञेय)

#काँपती है (अज्ञेय)

#क्योंकि मैं (अज्ञेय)

#क्वाँर की बयार (अज्ञेय)

#खुल गई नाव (अज्ञेय)

#घर-1-5 (अज्ञेय )

#चाँदनी चुपचाप सारी रात (अज्ञेय)

#चांदनी जी लो (अज्ञेय)

#जाड़ों में (अज्ञेय)

#जो कहा नही गया (अज्ञेय)

#जो पुल बनाएंगे (अज्ञेय)

#ताजमहल की छाया में (अज्ञेय)

#तुम्हारी पलकों का कँपना (अज्ञेय)

#दूर्वांचल (अज्ञेय)

#दृष्टि-पथ से तुम जाते हो जब (अज्ञेय)

#देखिये न मेरी कारगुज़ारी (अज्ञेय)

#देना-पाना (अज्ञेय)

#नया कवि : आत्म-स्वीकार (अज्ञेय)

#नाता-रिश्ता-1-5 (अज्ञेय)  

#पक गई खेती (अज्ञेय)

#पराजय है याद (अज्ञेय)

#पानी बरसा (अज्ञेय)

#प्रतीक्षा-गीत (अज्ञेय)

#प्रथम किरण (अज्ञेय)

#प्राण तुम्हारी पदरज़ फूली (अज्ञेय)

#फूल की स्मरण-प्रतिमा (अज्ञेय)

#मेरे देश की आँखें (अज्ञेय)

#मैंने आहुति बन कर देखा (अज्ञेय)

#मैं ने देखा, एक बूँद (अज्ञेय)

#मैं ने देखा : एक बूंद (अज्ञेय)

#मैंने पूछा क्या कर रही हो (अज्ञेय)

# मैं वह धनु हूँ (अज्ञेय)

#यह दीप अकेला (अज्ञेय)

#याद (अज्ञेय)

#ये मेघ साहसिक सैलानी (अज्ञेय)

#योगफल (अज्ञेय)

#रात में गाँव (अज्ञेय)

#रात होते-प्रात होते (अज्ञेय)

#वन झरने की धार (अज्ञेय)

#वसंत आ गया (अज्ञेय)

#वसीयत (अज्ञेय)

#वासंती (अज्ञेय)

#विपर्यय (अज्ञेय)

#शब्द और सत्य (अज्ञेय)

#शरद (अज्ञेय)

#शिशिर ने पहन लिया (अज्ञेय)

#शोषक भैया (अज्ञेय)

#सत्य तो बहुत मिले (अज्ञेय)

#सर्जना के क्षण (अज्ञेय)

#साँप (अज्ञेय)

#सारस अकेले (अज्ञेय)

#हँसती रहने देना (अज्ञेय)

#हमारा देश (अज्ञेय)

#हवाएँ चैत की (अज्ञेय)

#हीरो (अज्ञेय)

#क्षणिकाएँ  (अज्ञेय)

#चुप-चाप (अज्ञेय)

#जीवन-छाया (अज्ञेय)

#धूप (अज्ञेय)

#नन्दा देवी-1-14 (अज्ञेय)

#पहाड़ी यात्रा (अज्ञेय)

#सोन-मछली (अज्ञेय)

#हाइकु (अज्ञेय)

#मात्सुओ बाशो का हाइकु (अज्ञेय द्वारा अनुदित)

#चिड़िया की कहानी / अज्ञेय

#धरा-व्योम / अज्ञेय

#सोन-मछली / अज्ञेय

#हे अमिताभ / अज्ञेय