सुमित्रानंदन पंत (1900-1977)   की गद्य-पद्य रचनाएँ/ Sumitranandan Pant ki Gadya-Padya Rachnayen

सुमित्रानंदन पंत (1900-1977)   की गद्य-पद्य रचनाएँ/ Sumitranandan Pant ki Gadya-Padya Rachnayen

(20 मई 1900—28 दिसम्बर 1977, अलमोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में भारद्वाज गोत्रीय ब्राह्मण परिवार में), पंतजी अपने माता-पिता की सबसे छोटी और आठवीं संतान थे। उनके बचपन का नाम गोसाईंदत्त था। पंतजी ने अपने बड़े भाई के मित्र सुमित्रानंदन सहाय के नाम पर अपना नाम सुमित्रानंदन रखा।

पंत की प्रगतिवादी अर्थात मार्क्सवादी रचनाएं : युगांत (1936  ई.), युगवाणी (1939 ई.) और ग्राम्या (1940

ई.)। पंत जी ने इन रचनाओं में मार्क्सवाद के स्वरूप तथा सिद्धांतों को बड़ी सफलता से अभिव्यक्त किया है।

पंत की अरविन्द-दर्शन से प्रभावित रचनाएं : स्वर्णकिरण (1947 ई.), स्वर्णधूलि (1947 ई.), वाणी, उत्तरा (1949 ई.) रजतशिखर (1951 ई.), शिल्पी (1952 ई.), सौवर्ण, अतिमा ( 1955 ई.), लोकायतन (1964 ई.) और चितम्बरा अरविंद-दर्शन से ओत-प्रोत रचनाएँ हैं।

पंत की लम्बी कविताएं : परिवर्तन, चाँदनी, पुरुषोत्तम राम इत्यादि।

 पंत का अतुकान्त (मुक्त) में रचित काव्य-संग्रह : कला औरर बूढ़ा चाँद।

पहली कविता : ‘गिरजे का घंटा’ (1916 ई., डॉ. अश्विवनी पाराशर के अनुसार पंतजी की पहली कविता ‘स्वप्न’ है, जो आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पादकत्व में प्रकाशित सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई।)

पंत जी की कविता का सबसे बड़ा तत्व उनका प्रकृति प्रेम है।

कविता-संग्रह

# वीणा (1918 ई., पन्त जी का प्रथम काव्य-संग्रह, इसे कवि ने ‘तुतली बोली में एक बालिका का उपहार’ कहा है।)

# ग्रन्थि  (1920 ई., प्रबन्ध-विरह काव्य, कुछ विद्वानों ने ग्रंथि को खंड-काव्य कहा है तो कुछ ने गीति-काव्य)

# उच्छ्वास (1921 ई.)

# पल्लव (1926 ई., इसे छायावाद का घोषणापत्र कहा जाता है।)

# गुंजन (1932 ई.)

# ज्योत्सना (1934 ई., काव्य नाटक)

# युगांत (1936 ई.)

# युगवाणी (1939 ई., ‘युगवाणी’ को भारतीय साम्यवाद की वाणी कहा जाता है)

# ग्राम्‍या (1940 ई.)

# पल्लविनी (1940 ई., पहले के काव्य-संग्रहों से चुनी हुई कविताएँ)

# आधुनिक कवि (1941 ई., कविता-संग्रह)

# स्वर्णकिरण (1947 ई.)

# स्वर्णधूलि (1947 ई.)

# युगपथ (1949 ई.)

# उत्तरा (1949 ई.)

# रजतशिखर (1951 ई., काव्यात्मक रूपक-संग्रह)

# शिल्पी (1952 ई., काव्यात्मक रूपक-संग्रह)

# अतिमा (1955 ई., काव्यात्मक रूपक-संग्रह)

# सौवर्ण (1956 ई., काव्यात्मक रूपक-संग्रह)

# वाणी (1958 ई.)

# रश्मिबन्ध (1958 ई.)

# चितम्बरा (1958 ई.)

# कला और बूढ़ा चाँद (1959 ई.)

# पतझड़ (1959 ई.)

# लोकायतन (1964 ई., महाकाव्य)

# किरण वाणा (1967 ई.)

# पौ फटने से पहले (1967 ई.)

# पतझर एक भाव क्रान्ति (1969 ई.)

# गीत हंस (1969 ई.)

# शंख ध्वनि (1971 ई.)

$ शशि का घाटी (1973 ई.)

# समाधिता (1973 ई.)

# आस्था (1973 ई.)

# सत्यकाम (1975 ई., महाकाव्य)

# गीत-अगीत (1976 ई.)

# संक्रान्ति (1977 ई.)

# आधुनिक कवि (भाग-2)

# खादी के फूल

# मुक्ति-यज्ञ

# युगांतर

# तारापथ

# मानसी

# अवगुंठित

# मेघनाद वध

 

चुनी हुई रचनाओं के संग्रह

# युगपथ (1949 ई.)

# चिदंबरा (1958 ई.)

# पल्लविनी

# स्वच्छंद (2000 ई.)

 

काव्य-नाटक/ काव्य-रूपक

# ज्योत्ना (1934 ई.)

# रजत-शिखर (1951 ई.)

# शिल्पी (1952 ई.)

#  युगपुरुष (1952 ई.)

#  छाया (1956 ई.)

आत्मकथात्मक संस्मरण

# साठ वर्ष : एक रेखांकन (1963 ई.)

आलोचना/निबन्ध

# गद्यपथ (1955 ई.)

# शिल्प और दर्शन (1961 ई.)

# कला और संस्कृति (1961 ई.)

# छायावाद : एक पुनर्मूल्यांकन (1966 ई., निराला व्याख्यानमाला में पढ़े तीन निबन्घों का संग्रह)

# साठ वर्ष और अन्य निबन्ध (1973 ई.)

पत्र-संग्रह

# पंत के सौ पत्र (1970 ई., सं. बच्चन)

कहानियाँ

# पाँच कहानिय़ाँ (1935 ई., पानवाला, उस बार, दम्पति, बन्नू, अवगुंठन)

उपन्यास

# हार  (1960 ई., 15 वर्ष की अवस्था में इसका लेखन)

अनूदित रचनाओं के संग्रह

# मधुज्वाल (उमर ख़ैयाम की रुबाइयों का फारसी से हिन्दी में अनुवाद)

संयुक्त संग्रह

# खादी के फूल/ सुमित्रानंदन पंत और बच्चन का संयुक्त काव्य-संग्रह

पत्रकारिता

#  ‘रूपाभ’ (मासिक, 1938 ई.)

पुरस्कार व सम्मान

# 1960 ई.  ‘कला और बूढ़ा चांद’ पर ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’

# 1961 ई. ‘पद्मभूषण’ हिंदी साहित्य की अनवरत सेवा के लिए

# 1965 ई.‘लोकायतन’ पर ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’

 # 1968 ई. ‘चिदम्बरा’ नामक रचना पर ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’