#बनावट की दृष्टि से शब्द-भेद : #रूढ़, #यौगिक और #योगरूढ़

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#बनावट की दृष्टि से शब्द-भेद : #रूढ़, #यौगिक और #योगरूढ़

#रूढ़ शब्द : ऐसे शब्द रूढ़ शब्द कहलाते हैं, जिनके खंड सार्थक न हों। जैसे : नाक, कान, पीला, पर। यहाँ प्रत्येक शब्द के खंड— जैसे : ना और क और का और न आदि अर्थहीन हैं, इसलिए ये रूढ़ शब्द कहलाते हैं।

#यौगिक शब्द : ऐसे शब्द जो दो शब्दों के मेल से बनते हैं और जिनके खंड सार्थक होते हैं, यौगिक कहलाते हैं । दो या दो से अधिक रूढ़ शब्दों के योग से यौगिक शब्द बनते हैं। जैसे : आग-बबूला, पीलापन, दूधवाला, घुड़सवार इत्यादि। यहाँ प्रत्येक शब्द के दो खंड है और दोनों सार्थक हैं।

#योगरूढ़ शब्द : ऐसे शब्द जो यौगिक हो तो होते हैं, पर अर्थ के विचार से अपने सामान्य अर्थ को छोड़ किसी परंपरा से विशेष अर्थ के परिचायक होते हैं, योगरूढ़ कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में, यौगिक शब्द जब अपने समान अर्थ को छोड़ विशेष अर्थ बताने लगें, तब वे योगरूढ़ कहलाते हैं। जैसे पंकज, लंबोदर, चक्रपाणि, जलज इत्यादि। पंकज का अर्थ है कीचड़ से या कीचड़ में उत्पन्न, पर इससे केवल कमल का अर्थ लिया जाएगा। अतः पंकज योगरूढ़ है। इसी तरह अन्य शब्दों को भी समझना चाहिए।

शब्द-भेद :

बनावट की दृष्टि से शब्द-भेद : रूढ़, यौगिक और योगरूढ़।

व्युत्पत्ति की दृष्टि से शब्द-भेद : तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज या विदेशी।