जयशंकर #प्रसाद की कहानियाँ

जयशंकर #प्रसाद की कहानियाँ

प्रेमचंद युग के प्रसाद स्कूल के प्रमुख हस्ताक्षर जयशंकर प्रसाद की कहानियां भारतीय संस्कृति, इतिहास और मानवता का सुंदर दस्तावेज है। प्रसाद की अधिकांश कहानियां भावात्मक और कल्पना-प्रधान हैं और सभी कहानियों की मूल संवेदना प्रेम है।

#प्रथम कहानी : ग्राम (1911 में ‘इंदु’ नामक पत्रिका में प्रकाशित)

#अंतिम कहानी : सालवती (1935 ई., सरस्वती में)

#कुल कहानियाँ  : 70

1. छाया (1912 ई., कहानी-संग्रह) : ग्राम (‘छाया’ कहानी-संग्रह की पहली कहानी, गांव की पृष्ठभूमि पर रचित सामाजिक यथार्थवादी आंचलिक और आदर्शवादी कहानी, नायक मोहनलाल), चंदा (प्रेम कहानी), मदन-मृणालिनी (सामाजिक प्रेम कहानी, रोमांटिक कहानी), रसिया बालम (ऐतिहासिक प्रेम कहानी, इसका आधार शीरीं-फ़रहाद है, राजस्थान के ऐतिहासिक उपकथा के आधार पर लिखी गई है), तानसेन (मुग़ल कालीन ऐतिहासिक कथानक) : ये पांचों कहानियाँ प्रथम संस्करण में संकलित हुई थीं। इसके द्वितीय संस्करण में 06 कहानियाँ सम्मिलित की गईं : जहाँआरा (इस ऐतिहासिक कहानी में शाहजहां की पुत्री का त्याग और सेवा-शुश्रूषा भाव का चित्रण), शरणागत (छह खंडों में विभक्त इस ऐतिहासिक कहानी में  1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय हुए सैनिक विद्रोह के भारतीय इतिहास की झांकी प्रस्तुत की गई है), अशोक (इस ऐतिहासिक कहानी में अशोक की नृशंस आज्ञा और अशोक के अहिंसावादी होने की कथा, पात्र : अशोक, कुणाल, वीताशोक, तिष्यरक्षिता), सिकंदर की शपथ (ऐतिहासिक कहानी), ग़ुलाम (ऐतिहासिक कहानी, एक अत्यंत सुंदर बालक को नपुंसक बनाकर शाहआलम द्वारा ग़ुलाम बनाया जाना और ग़ुलाम द्वारा बदले में शाहआलम की आंखें निकालने की कथा), चित्तौड़-उद्धार (बाल-विधवा-विवाह, पात्र : चित्तौड़ का शासक मालदेव, चित्तौड़ के शासक की पुत्री, सिसोदिया कुल का दीपक राणा हम्मीर)। कुल   11 कहानियाँ।

2. प्रतिध्वनि (1926 ई., कहानी-संग्रह) : प्रसाद (नायिका सरला के मन में देवप्रतिमाओं और मंदिर के वातावरण को देखकर उसने वाली भावनाओं का चित्रण, कथानक शून्य कहानी), गूदड़साईं (रेखाचित्र-शैली में रचित इस कहानी में नायक गूदड़साईं का सुन्दर चरित्र-चित्रण हुआ है), पत्थर की पुकार (यह कहानी रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी क्षुधित पाषाण जैसी है, जिसमें शिल्पा के काे क्रोध-बाव को व्यक्त किया गया है), अघोरी का मोह, पाप की पराजय (समस्या मूलक कहानी), सहयोग, उस पार का योगी, करुणा की विजय (यह करुणा, दरिद्रता और अभिमान तीनों मनोभावों के वार्तालाप की कहानी है),खंडहर की  लिपि (ऐतिहासिक भावभूमि पर रचित या कहानी लेखक का भावोच्छवास मात्र है), कलावती की शिक्षा (पारिवारिक परिवेश की झांकी, इस कहानी में श्यामसुंदरदास की पत्नी द्वारा पुतली के माध्यम से स्त्रियों को आधुनिक बनाने की शिक्षा दी गई है), चक्रवर्ती का स्तम्भ (मौर्यकालीन और मुगलकालीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचित इस कहानी में अशोक निर्मित चक्रवर्ती स्तंभ के समीप एक जंगल में एक वृद्ध का अपनी धर्मरक्षिता पुत्री के साथ भेड़ चराना, मुगल सेनाओं द्वारा लूटमार और इसी बीच प्रकृति प्रकोप से स्तंभ का गिरना और सबका कालकवित होना इस कहानी के कथानक के मूल में है), दुखिया (सामाजिक पृष्ठभूमि पर रचित इस कहानी में जमींदार के बूढ़े नौकर के अंधा होने पर उसकी लड़की द्वारा ज़मींदार के घोड़े के लिए घास लाना, ज़मींदार पुत्र का घोड़े से गिरना, लड़की द्वारा मदद करना, युवक ज़मींदार द्वारा भावुक होकर बूढ़े को रुपए देने का चित्रण हुआ है), प्रतिमा (मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर रचित इस कहानी में कुंजनाथ के कुंजबिहारी मंदिर के प्रति अपार श्रद्धा, पत्नी की मृत्यु के उपरांत ईश्वर के प्रति और अश्रद्धा का भाव पैदा होना, रजनी (साली) की प्रेरणा से कुंजीनाथ के पुनः आस्तिक होने की कथा कही गई है), प्रलय (इस प्रतीकवादी कहानी को आलोचकों ने ‘कामायनी का बीज’ कहा है। इस कहानी की अनेक पंक्तियां कामायनी में मिलती हैं। इस कहानी के प्रतीक चाहे पुरुष और स्त्री, शिव और भक्ति अथवा ब्रह्म और माया हों,भारतीय दर्शन के परंपरागत प्रतीक हैं), गुदड़ी के लाल  (शब्दचित्र-शैली में रचित इस कहानी में नायिका का बुधिया का चरित्र-चित्रण किया गया है)। कुल 15 कहानियाँ।

3. आकाशदीप (1929 ई., कहानी-संग्रह) : आकाशदीप (महाजलपोतसे संबद्ध ओक नाव पर बंदी दस्यु बुद्धगुप्त और चंपा के बीच प्रेम होना, उनका बंधनमुक्त होना, बुधगुप्त को अपने पिता का हत्यारा जानकर चंपा के हृदय में भयानक अंतर्द्वंद उठना, पिता की समाधि की खोज में चंपा का द्वीप पर अकेले रह जाना और प्रेमी बुद्धगुप्त का एकाकी भारत लौटना आकाशदीप का कथानक है), ममता (विधवा ब्राह्मणी ममता को अपने पिता चूड़ामणि (रोहतास दुर्ग के अधिपति के मंत्री) द्वारा धन में उलझाकर उसके वैधव्य को विस्तृत कराने का प्रयास, ममता द्वारा उत्कोच से प्राप्त धन से इनका, शेरशाह का छलपूर्वक दुर्ग पर अधिकार,ममता का दुर्ग से निकलकर उत्तर धर्मचक्र बिहार में एक झोपड़ी बनाकर रहना, बक्सर की लड़ाई में परास्त हुमायूँ को एक रात के लिए ममता द्वारा शरण देना, अकबर द्वारा इस घटना की स्मृति में एक अष्टकोण मंदिर की स्थापना इत्यादि का वर्णन इस कहानी में हुआ है), स्वर्ग के खंडहर में (सौंदर्य-प्रेम पर आधारित ऐतिहासिक कहानी), सुनहला सांप (इस मनोवैज्ञानिक कहानी का फलक इस यथार्थ से निर्मित हुआ है कि मनुष्य दूसरे को क्या ख़ुद को भी नहीं पहचान पाता है), हिमालय का पथिक (प्रकृति-प्रेम पर आधारित इस कहानी में एक पथिक उद्देश्यहीन व्यक्ति की कथा कही गई है), ), भिखारिन (एक भिखारिन का रूप-चित्रण, उसकी स्वाभिमानी प्रवृत्ति का चित्रण, इस कहानी में इस बात का चित्रण भी किया गगया हा कि ढोंग के नाम पर पंडितों और पंडों को बहुत कुछ किया जाता है, लेकिन भिखारिन को मांगते देखकर लोग अपना मुंह फिर लेते हैं), प्रतिध्वनि (सामाजिक और मनोवैज्ञानिक श्रेणी की कहानी में स्त्रियों के द्वेष-भाव के साथ इस स्थिति का भी प्रतिपादन किया गया है कि जिस व्यक्ति का सर्वस्व नष्ट हो जाता है, वह विक्षिप्त अथवा पागल-सा हो जाता है), कला, देवदासी (दक्षिण के मंदिरों में प्रचलित देवदासी प्रथा का चित्रण इस कहानी में किया गया है, देवदासी की मनोव्यथा,विवशता और धर्म के नाम पर आडम्बर करनेवाले पंडे-पुजारियों की धूर्तता को उजागर किया गया है), समुद्र-संतरण (यह एक सुखांत रोमांचक कहानी है), वैरागी (इस कहानी में है योग और भोग के महत्व का प्रतिपादन के द्वारा सच्चे वैराग्य भाव का चित्रण किया गया है), बनजारा (पुलिस के अत्इयाचार की कहानी,स मनोवैज्ञानिक कहानी में बंजारे-जीवन के रोमांस का चित्रण हुआ है), चूड़ीवाला (इसमें पुनर्विवाह का चित्रण किया गया है, नायक विजयकृष्ण की पत्नी द्वारा चूड़ीवाली का पहले तिरस्कार और अंत में विजयकृष्ण की यक्ष्मा-पीड़ित पत्नी की मृत्यु के बाद चूड़ीवाली के साथ दांपत्य सूत्र में बंधने की कथा है), अपराधी (इस कहानी में बड़े लोगों द्वारा छोटे लोगों को दबाने की प्रवृत्ति का चित्रण हुआ है), प्रणय चिह्न (प्रेम संवेदना और रूमानी तत्वों का चित्रण ), रूप की छाया (इस कहानी में भागीरथी के तट पर नायिका सरला का रूपवान और अध्ययनरत शैलनाथ को देखकर इस बात का भ्रम होना की उसके साथ उसका बाल-विवाह हुआ था), ज्योतिष्मति (इस प्रतीकात्मक और रहस्यवादी कहानी में नायिका अपने पिता के दुश्मन से प्रेम करती है और प्रेम तथा घृणा के द्वंद में जीती है), रमला (यह प्रेम-संवेदना पर आधारित एक प्रतीकात्मक कहानी है), बिसाती। कुल 19 कहानियाँ।

4. आंधी (1929 ई., कहानी-संग्रह) : आंधी (आत्मकथात्मक शैली में रचित, प्रसाद की सबसे लम्बी कहानी में बंजारों की एक उग्र व्यक्तित्व वाली युवती लैला और एक बाल बच्चों वाले पुरातात्विक वस्तुओं के  व्यापारी रामेश्वर की प्रेम-कथा का वर्णन किया गया है), मधुवा (भावात्मक शैली में रचित इस कहानी में एक शराबी के हृदय-परिवर्तन और मधुवा नामक बाल पात्र के प्रति उसके प्रेम का मनोरम चित्रण हुआ है), दासी (पत्मर-शैली में रचित, हमूद के आक्रमणकालीन भारतीय वातावरण को चरितार्थ करने वाली यह कहानी फ़ीरोज़ा नाम की दासी और अहमद निआल्तगीन, बलराम, इरावती इत्यादि पात्रों से संबंधित है। बलराम जाटों का सरदार बनता है और इरावती रानी। चनाब का प्रांत इरावती की करुणा से हरा-भरा हो जाता है, किंतु फ़ीरोज़ा की प्रसन्नता की वही समाधि बन जाती है और फ़ीरोज़ा उस समाधि की आजीवन दास की बनती है), घीसू (इस कारुणिक वातावरण प्रधान आदर्शवादी कहानी में बिंदु नामक विधवा स्त्री की दयनीय दशा और घीसू की निर्धनता का यथार्थपरक चित्रण किया गया है), बेड़ी (आत्मकथात्मक शैली में रचित, यथार्थवादी कहानी में जठराग्नि के शमन हेतु एक अंधे पिता द्वारा पुत्र के पैरों में भी डालने की मार्मिक कथा का चित्रण), व्रतभंग (मौर्यकालीन ऐतिहासिक वातावरण पर आधारित इस कहानी में पाटलिपुत्र के नागरिक वातावरण का चित्रण किया गया है। भोग पर त्याग और अभिमान पर सेवा-भाव की विजय के उद्देश्य सृजित इस कहानी में कपिंजल जैसे छद्मवेशी ढोंगी साधुओं के यथार्थ रूप के साथ-साथ आदर्शवादी राधा का चरित्र-चित्रण किया गया है), ग्राम-गीत (भाट नंदन की विक्षिप्त बाल-विधवा रोहिणी के प्रेम और वेदना का सरस चित्रण), विजया (आदर्शवादी समाज सुधार से संबंधित कहानी), अमिट स्मृति (वातावरण प्रधान इस कहानी में प्रसाद के नौका-विहार प्रेम, चंद्रिका-प्रेम और काशी-प्रेम की झांकी इस कहानी में मिलती है), नीरा (समस्या-मूलक कहानी में निर्धनता और प्वारसी भारतीयों की दयनीय दशा का चित्रण), पुरस्कार (इस संग्रह की सर्वश्रेष्ठ कहानी, नर-नारी और देश-प्रेम, नायक अरुण और नायिका मधूलिका)। कुल 11 कहानियाँ।

5. इंद्रजाल (1936  ई. अंतिम कहानी-संग्रह) : इंद्रजाल (कंजर जीवन का सुंदर चित्रांकन, तीन खंडों में विभक्त इस कहानी  के पहले खंड में बेला का विवाह भूरे से, दूसरे खंड में ठाकुर से और तीसरे खंड में गोली के साथ दिखाया गया है।), सलीम (चरित्र प्रधान कहानी में सलीम को चरित्रांकन,  हिंदू-मुस्लिम एकता पर आधारित), छोटा जादूगर (आत्मकथात्मक शैली, आदर्शवादी  कहानी, बाल पात्र विकास के कठोर परिश्रम और उसकी चतुराई की कथा), नूरी (अकबर की विलासिता और उसकी राजनीतिक विचारधारा का चित्रण और नूरी के प्रेम और कर्तव्य, देश-प्रेम  एवं नर-नारी-प्रेम का मनोरम चित्रण), परिवर्तन (सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक श्रेणी की कहानी, इसमें चंद्रेश और मालती के दांपत्य जीवन में बिखराव, सेविका बूटी के माध्यम से मानसिक परिवर्तन एवं सुखमय जीवन के निर्माण का चित्रण), संदेह (चरित्र-प्रधान कहानी, इसमें मोहनलाल, रामनिहाल, श्यामा इत्यादि सभी पात्रों को संदेह की मनोवृति का चित्रण किया गया है), भीख में (सामाजिक कहानी, नायक ब्रजराज के अन्यमनसेक और सनकी मनोभाव का चित्रण, प्रतिवेशिनी लड़की पर मुग्ध होने के कारण परिवार के बर्बाद होने की कथा), चित्रवाले पत्थर (आत्मकथात्मक शैली में रचित, प्रकृति-प्रेम पर आधारित भारतीय विधवा-जीवन की व्यथा कथा, इस कहानी में मंगला के माध्यम से भारतीय विधवा की कारुणिक कथा कहीं गई है), चित्र मंदिर( इस कहानी में प्रतिहिंसा, संवेदना, द्वेष, ईर्ष्या, भय, स्नेह, अनुराग,घृणा, हर्ष ,विषाद इत्यादि  माननीय मनोवृत्तियों  की उत्पत्ति और विकास की कहानी एक युवक और युवती के माध्यम से कही गई है), गुंडा (इस संग्रह की सर्वश्रेष्ठ कहानी, प्रेम कथा, नन्हकू सिंह द्वारा पन्ना को पत्नी रूप में न पाकर काशी का गुंडा बनने और प्रेम पर कर्तव्य का पालन करते हुए त्याग की कथा है यह, इसमें भारत के ईस्ट इंडिया कम्पनी के युग का चित्रण हुआ है),  अनबोला (बाल मनोवैज्ञानिक कहानी, यह कहानी में जगैया और कामैया के छोटी-सी बात पर जगैया से कामैया के रूठने और अनबोला होने की कहानी), देवरथ (बौद्ऐध धर्तिम और उसके विकृत वज्हारयानी रूप का यथार्सिथपरक चित्करण, कहानी, इसकहानी की भाव भूमि बौद्ध धर्म  पर आधारित  सुजाता और आर्यमित्र की प्रेम कहानी है, जिसमें यह संदेश दिया गया है कि मनुष्यता का नाश करके कोई भी धर्म खड़ा नहीं हो सकता), विराम चिह्न (सामाजिक कहानी,  अछूतों मंदिर-प्रवेश-निषेध का सजीव चित्रण), सालवती  (प्रसाद की अंतिम कहानी, 1935 में सरस्वती में प्रकाशित सौंदर्य प्रेम पर आधारित ऐतिहासिक कहानी, मगध गणराज्य एवं वैशाली गणराज्य के उस युग के समाज, धर्म और राजनीति का चित्रण, वैशाली की नगरवधू के रूप में सालवती और वेश्यावृत्ति की विभीषिका का चित्रण इस कहानी में मनोरम चित्रण हुआ है)। कुल 14 कहानियाँ।

प्रसाद की कुल 70 कहानियाँ।

प्रसाद की कहानियों के अमर पुरुष पात्र : नरसिंह (गुंडा), बुधगुप्त (आकाशदीप),अरुण (पुरस्कार), बलवंत सिंह  (रसिया बालम),  हीरा (चंदा), कादिर (गुलाम), शिल्पी (पत्थर की पुकार), नंदलाल (उस पार का योगी), याकूब खां (नूरी), अभय (सालवती) प्रज्ञा सारथी (आंधी), आर्यमित्र (देवरथ)।

प्रसाद की कहानियों के अमर स्त्री पात्र  : सोसन (तानसेन), चंदा (चंदा), बालिका (ग्राम), राजकुमारी (रसिया बालम), चंपा (आकाशदीप), मधूलिका (पुरस्कार(, ममता (ममता), लैला (आंधी), किन्नरी (हिमालय का पथिक), मीना (स्वर्ग के खंडहर), पद्मा (देवदासी), शीरीं (बिसाती), कला (कला), विलासिनी (चूड़ी वाली), फ़ीरोज़ा (दासी), इरावती (दासी), सुजाता (देवरथ)।