संविधान में हिंदी

 

संविधान में हिंदी

  • भारतीय संविधान के भाग 17, अनुच्छेद 343 से 351 में वर्णित भाषा-सम्बन्धी विवरण मुंशी आयंगर फ़ॉर्मूला के नाम से प्रसिद्ध है। संविधान के भाग 17 के अध्याय 1 की धारा 343 में संघ की राजभाषा को हिंदी और लिपि को देवनागरी कहा गया है।

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से हिंदी को भारत की राजभाषा हिंदी और देवनागरी को संघ की लिपि घोषित किया और यह भी कहा कि संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा। इसलिए 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। परन्तु वर्तमान में भारत की राजभाषा हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों हैं। सरकारी कामकाज की भाषा को राजभाषा कहते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 344 में राजभाषा से संबंधित आयोग और संसदीय समिति का उल्लेख है। संविधान के अनुच्छेद 344 के अनुपालन में राष्ट्रपति द्वारा 7 जून 1955 को प्रथम राजभाषा आयोग का गठन बालगंगाधर खेर (बी. जी. खेर) की अध्यक्षता में किया। विभिन्न राज्यों से इसके 20 सदस्य मनोनित किए गए। आयोग ने 19 सिफारिशें प्रस्तुत कीं। 1963 ई. में ‘राजभाषा अधिनियम’ पारित हुआ। ‘संसदीय राजभाषा समिति’ 1976 ईस्वी, ‘वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग’ 1961 ईस्वी और ‘केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो’ 1971 ईस्वी में गठित किए गए।

  • संविधान की अष्टम अनुसूची में आरंभ में केवल 14 भारतीय भाषाएं थीं, जिनमें हिंदी भी शामिल थी, परंतु संविधान के 21वें संशोधन (1967 ई.) में सिन्धी को और 71वें संशोधन अधिनियम (1992 ई.) में नेपाली, मणिपुरी और कोंकणी को संविधान की मान्यता प्राप्त भाषाओं में शामिल किया गया। फलतः अष्टम अनुसूची में भाषाओं की संख्या 18 हो गई और संविधान के 92वें संशोधन अधिनियम (2003 ई.) द्वारा आठवीं अनुसूची में मैथिली, डोंगरी, बोडो और संथाली को शामिल कर लेने के कारण संविधान की अष्टम अनुसूची में सम्मिलित भाषाओँ की कुल संख्या 22 हो गई। अब संविधान की अष्टम अनुसूची में सम्मिलित भाषाएं ये हैं
  1. असमिया 2. बांग्ला 3. गुजराती 4. हिंदी 5. कन्नड़ 6. कश्मीरी 7. कोंकणी 8. मलयालम 9. मणिपुरी 10. मराठी 11. नेपाली 12. ओडिया 13. पंजाबी 14. संस्कृत 15. सिन्धी 16. तमिल 17. तेलुगु 18. उर्दू 19. बोडो 20. मैथिली 21. संथाली और 22. डोंगरी।
  • संविधान के अनुच्छेद 345 के अनुसार, राज्य में प्रयुक्त होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अनेक या हिंदी को शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 346 के अनुसार, एक राज्य तथा दूसरे राज्य के मध्य संचार की भाषा वही होगी, जो उस समय संघ की राजभाषा होगी।
  • संविधान के अनुच्छेद 347 में किसी राज्य की जनसंख्या के किसी विभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त भाग यह चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को मान्यता दी जाए तो इस सम्न्ध में निर्देश देने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है।
  • संविधान के अनुच्छेद 348 में उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा का उल्लेख है। संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय तथा प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी में होंगी।
  • संविधान के अनुच्छेद 349 में भाषा-संबंधी विधियों को अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया का उल्लेख है।
  • संविधान के अनुच्छेद 350 में शिकायतों को दूर करने के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा का उल्लेख हुआ है और संविधान के राजभाषागत अनुच्छेदों के प्रथम संशोधन में 350 (क) और 350 (ख) जोड़े गए।
  • संविधान के अनुच्छेद 150 (क) में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा सुविधाओं का उल्लेख है और संविधान के अनुच्छेद 350 (ख) में भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए राष्ट्रपति द्वारा विशेष अधिकारी की नियुक्ति का उल्लेख है। राजभाषा के सन्दर्भ में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी का कर्तव्य है कि भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए उपबन्धित सभी विषयों का अन्वेषण-निरीक्षण करे।
  • संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देशों का उल्लेख हुआ है और इसी अनुच्छेद में हिंदी पर सामासिक संस्कृति के वाहन का दायित्व निर्धारित किया गया है