हरिवंश राय बच्चन (1907-2003 ई.) की रचनाएं

हरिवंशराय बच्चन (1907-2003 ई.) की रचनाएं
जन्म : 1907 ई. में इलाहाबाद (उ. प्र.) मे हुआ था।
निधन : 8 जनवरी 2003 ई. को मुम्बई में।

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रिवंश राय बच्चन की रचनाएँ

कविता-संग्रह
#तेरा हार (1932)
#मधुशाला (1935 ई.)
#मधुबाला (1936 ई.)
#मधुकलश (1937 ई.)
#निशा निमन्त्रण (1938 ई.)
#एकांत संगीत (1939 ई.)
#आकुल अंतर (1943 ई.)
#सतरंगिनी (1945 ई.)
#हलाहल (1946 ई.)
#बंगाल का अकाल (1946 ई.)
#खादी के फूल (1948 ई.)
#सूते की माला (1948 ई.)
#मिलन यामिनी (1950 ई.)
#प्रणय-पत्रिका (1955 ई.)
#धार के इधर-उधर (1957 ई.)
#आरती और अंगारे (1958 ई.)
#बुद्ध और नाचघर (1958 ई.)
#त्रिभंगिमा (1961 ई.)
#चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962 ई.)
#दो चट्टानें (1965 ई.)
#नागर गीता (1966 ई.)
#बहुत दिन बीते (1967 ई.)
#कटती प्रतिमाओं की आवाज़ (1968 ई.)
#उभरते प्रतिमानों के रूप (1969 ई.)
#जाल समेटा (1973 ई.)
विविध
#बचपन के साथ क्षण भर (1934 ई.)
#ख़य्याम की मधुशाला (1938 ई.)
#सोपान (1953 ई.)
#मैकबेथ (1957 ई.)
#जनगीता (1958 ई.)
#ओथेलो (1959 ई.)
#उमर ख़य्याम की रुबाइयाँ (1959 ई.)
#कवियों के सौम्य संत : पंत (1960 ई.)
#आज के लोकप्रिय हिन्दी कवि : सुमित्रानंदन पंत (1960 ई.)
#आधुनिक कवि : 7 (1961 ई.)
#नेहरू : राजनैतिक जीवनचित्र (1961 ई.)
#नये पुराने झरोखे (1962 ई.)
#अभिनव सोपान (1964 ई.)
#चौसठ रूसी कविताएँ (1964 ई.)
#डब्लू बी यीट्स एंड औकल्टिज़्म (1968 ई.)
#मरकट द्वीप का स्वर (1968 ई.)
#नागर गीत (1966 ई.)
#बचपन के लोकप्रिय गीत (1967 ई.)
#हैमलेट (1969 ई.)
#भाषा अपनी भाव पराये (1970 ई.)
#पंत के सौ पत्र (1970 ई.)
#प्रवास की डायरी (1971 ई.)
#टूटी छूटी कड़ियां (1973 ई.)
#मेरी कविताई की आधी सदी (1981 ई.)
#सोहं हंस (1981 ई.)
#आठवें दशक की प्रतिनिधि श्रेष्ठ कवितायें (1982 ई.)
#मेरी श्रेष्ठ कविताएँ (1984 ई.)
#हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा
#क्या भूलूं क्या याद करूं (1969 ई.)
#नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.)
#बसेरे से दूर (1977 ई.)
#दशद्वार से सोपान तक (1965 ई.)
रचनावली
#बच्चन रचनावली के नौ खण्ड (1983 ई.)
#दो चट्टानें (काव्य-संग्रह) को 1968 ई. में हिन्दी कविता का साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मनित किया गया था। इसी वर्ष उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार तथा एफ्रो एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। बिड़ला फाउन्डेशन ने उनकी के लिये उन्हें सरस्वती सम्मान दिया था।