भीष्म साहनी की रचनाएं

भीष्म साहनी (1915-2003)

जन्म : 8 अगस्त 1915  रावलपिंडी (तत्कालीन) भारत, वर्तमान पाकिस्तान

मृत्यु : 11 जुलाई 2003 दिल्ली भारत

प्रेमचन्द की परम्परा के प्रगतिवादी साहित्यकार,

नयी कहानियां नामक पत्रिका का सम्पादन (1965-1967),

साहित्य अकादमी के कार्यकारी समिति के सदस्य (1993-1997)।

रचनाएँ

#नौ कहानी-संग्रह

#भाग्य-रेखा (1953),

#पहला पाठ (1957),

#भटकती राख (1966),

#पटरियाँ (1973),

#वाङ्चू (1978),

#शोभायात्रा (1981),

#निशाचर (1983),

#पाली  (1989)

#डायन (1998)।

#प्रसिद्ध कहानियाँ : #चीफ़ की दावत (इस कहानी मेंंं उपेक्षिता और परिवार में कूड़ा+करकट की तरह की पाई जाने वाली बूढ़ी मां का महत्व उजागर करके प्रतीकात्मक ढंग से परंपरा का काा महत्वर दिखाया गयाा है कीीीी), #अमृतसर आ गया है, #ओ हरामज़ादे, #वाङ्चू़, #त्रास, #तमगे (इस कहानी में द्वितीय विश्वयु‌द्ध की  मानव-विरोधी फासिस्ट प्रवृत्ति और सामान्य जनता पर उसके दुष्प्रभाव का चित्रण किया है)  #अहं ब्रह्मास्मि।

#सात उपन्यास :

#झरोखे (1967),

#कड़ियाँ (1970),

#तमस (1973 ई.,1975 ई. मैं साहित्य अकादमी से सम्मानित इस उपन्यास में 1947 ई. के मार्च-अप्रैल में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगे की 5 दिनों की कहानी कहीं गई है।),

#बसंती (1980),

#मय्यादास की माड़ी (1988 ई., इस उपन्यास में भीष्म साहनी ने मय्यादास की माड़ी को केंद्र बनाकर 19वीं सदी के मध्य से बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध तक तीन पीढ़ियों का सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना के कर्मिक विकास का प्रमाणिक इतिहास प्रस्तुत किया है। पात्र : मय्यादास, धनपत, हुकूमत राय),

#कुंतो (1993 ई.),

#नीलू नीलिमा नीलोफर (2000 ई., पात्र : नीलू नीलोफर, सुधीर, नीलिमा, अल्ताफ़)

जयहिंद की सेना (2010 ई.)।

नाटक : 

#हानुष (1977),

#कबीरा खड़ा बाज़ार (1981),

#माधवी (1985),

#मुआवज़े (1993),

#रंग दे वसन्ती चोला (1998),

#आलमगीर (1999)।

बाल-साहित्य : 

#गुलेल का खेल,

#वापसी

आत्मकथा :

#बलराज माय ब्रदर,

#आज के अतीत (2003)।

पुरस्कार
1975 : #साहित्य अकादमी पुरस्कार तमस पर

1975 : #शिरोमणि लेखक सम्मान (पंजाब सरकार)

1980 : #लोटस पुरस्कार (अफ्रो-एशियन राइटर्स असोसिएशन की ओर से)

1983 : #सोविएत लैंड नेहरू अवार्ड,

1998 : #पद्मभूषण (भारत सरकार)।