स्थायी भाव की संख्या

स्थायी भाव की संख्या

भरतमुनि ने स्थायी भाव की संख्या आठ मानी थी— रति, हास, शोक, क्रोध, उत्साह, भय, जुगुप्सा और विस्मय। बाद में संस्कृत के आचार्यों ने निर्वेद (शम) को जोड़ कर स्थायी भाव की संख्या नौ कर दी। वर्तमानमें इसकी संख्या ग्यारह है। चार्यों ने स्थायी भाव के वर्ण और देवताओं की परिकल्पना भी प्रस्तुत की है, जो निम्नलिखित हैं :

स्थायी भाव रस वर्ण देवता

1. रति  श्रृंगार श्याम विष्णु

2. हास हास्य श्वेत प्रमथ

3. शोक करुण कपोत यम-वरुण

4. क्रोध रौद्र रक्त रुद्र

5. जुगुप्सा वीभत्स नील महाकाल

6. भय भयानक कृष्ण कालदेव (भूतपिशाच)

7. उत्साह वीर स्वर्ण, गौर इंद्र, महेंद्र

8. विस्मय अद्भुत पीत गंधर्व, ब्रह्मा

9. निर्वेद शांत अरुण पूषा

10. रति (पुत्र या शिशु विषयक) वात्सल्य ईषदरुणाम वासुदेव

11. ईश्वर विषयक रति भक्ति