अंधेर नगरी के दृश्य और पात्र

‘अंधेर नगरी’ का अंतिम दृश्य है :

(1) अरण्य (2) जंगल (3) बाज़ार (4) श्मशान

Ans.     4 (10      Hindi      61547512297      61547547938)

‘अंधेर नगरी’ के दृश्य क्रमानुसार : समर्पण, प्रथम दृश्य (वाह्य प्रांत), दूसरा दृश्य (बाज़ार), तीसरा दृश्य (जंगल), चौथा दृश्य (राजसभा) पांचवा दृश्य (अरण्य), छठा दृश्य (श्मशान)।

‘अंधेर नगरी’ के पात्र : महंत जी, चेले, कबाब वाला, घासीराम, नरंगी वाली, हलवाई,  कुजड़िन, मुगल, पाचक वाला, मछली वाली, जातवाला (ब्राह्मण) बनियां, गोवर्धन दास, सेवक, राजा, मंत्री, नौकर, फ़रियादी, कल्लू, कारीगर, चुने वाला, भिश्ती, कस्साई, गड़ेरिया, कोतवाल, प्यादा, सिपाही, गुरुजी, नारायण दास

#अंधेर नगरी/Andher Nagari (1881 ई., भारतेंदु हरिश्चंद्र), NTA/UGCNET/JRFके नए सिलेबस में शामिल : Hindi Sahitya Vimarsh

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प्रमुख पात्र : महन्त जी, नारायण दास, गोवरधन दास, कबाबवाला, घासीराम, नरंगीवाली, हलवाई, कुजड़िन, राजा, मंत्री इत्यादि।

अंधेर नगरी (1881 ई.) प्रहसन में राजकीय अस्तव्यस्तता का बड़ा ही जीवन्त और हास्यपूर्ण चित्रण किया गया है। इसमें नाटककार ने दिखाया है कि मूर्ख राजा की प्रजा पीड़ित होती है। जिस राज्य में गुणों की क़द्र नहीं, गुण-अवगुण समान समझा जाता है, उस राज्य की अवस्था पतनेन्मुख होगी ही।