विलोम शब्द/विपरीतार्थक शब्द (VILOM SHABD)-1

#विलोम शब्द में किसी शब्द का विपरीत अर्थ वाला शब्द होता है। अर्थात् शब्दों का विपरीत अर्थ देने वाले शब्द कई तरह से बनते हैं जिनमें से कुछ नियम ये हैं :

#लिंग-परिवर्तन के द्वारा : माता-पिता, माँ-बाप, भाई-बहन, बेटा-बेटी, लड़का-लड़की, राजा-रानी, वर-कन्या इत्यादि।

#अलगअलग शब्दों के प्रयोग द्वारा : लघु-गुरु, छोटा-बड़ा, लाभ-हानि, मूक-वाचाल, कटु-मधु इत्यादि।

#प्रत्यय-परिवर्तन द्वारा : गतिवान-गतिहीन, विवेकपूर्ण-विवेकशून्य, श्रीयुत्-श्रीहीन इत्यादि।

#नञ् (अ) लगाकर : आदि-अनादि, सभ्य-असभ्य, संभव-असंभव, लौकिक-अलौकिक, क्षर-अक्षर इत्यादि।

#उपसर्ग जोड़कर : जय-पराजय, यश-अपयश, मान-अपमान घात-प्रतिघात, राग-विराग इत्यादि।

#उपसर्ग बदलकर : आदान-प्रदान, आयात-निर्यात, उपकार-अपकार, संयोग-वियोग इत्यादि।

उदाहरण :

अंतर्द्वन्द्व-बहिर्द्वंद्व

अंतर्मुखी-बहिर्मुखी

अंतरंग-बहिरंग

#अकाम-सकाम

#अकाल-सुकाल

#अगला-पिछला

#अधम-उत्तम

#अग्र-पश्चात

#अधिकार-अनधिकार

#अमावस्या-पूर्णिमा

#अग्रज-अनुज

#अगम-सुगम

#अग्नि-जल

#अंगीकार-इनकार

अंधकार-प्रकाश

#अघ-अनघ

#अचल-चल

#अर्जन-वर्जन

अज्ञ-विज्ञ, प्रज्ञ

#अतल-वितल

#अति-अल्प

#अत्यधिक-स्वल्प

#अंतरंग-बहिरंग

अनुग्रह-विग्रह

#अर्थ-अनर्थ

#अर्थी-प्रत्यर्थी

#अदोष-सदोष

#अधः-उपरि

अधम-उत्तम

#अधिक-अल्प

#अधिकतम-न्यूनतम

#अधिकारी-अनधिकारी

#अधुनातन-पुरातन

#अध्यसाय-अनध्यवसाय

#अध्याय-अनध्याय

#अंधकार-प्रकाश

#अनन्त-सान्त

#अतिवृष्टि-अनावृष्टि

#अनाथ-सनाथ

#अनुकरण-अननुकरण

#अनुकूल-प्रतिकूल

#अनुग्रह-विग्रह

#अनुरक्त-विरक्त

अनुरक्ति-विरक्ति

#अनुराग-विराग

#अनुलोम-प्रतिलोम

#अनय-नय

अतिवृष्टि-अनावृष्टि

#अतिरिक्त-अनतिरिक्त

#अन्त-आदि

#अथ-इति

आगमन-प्रस्थान

#आदि-अन्त

#अन्तर्द्वन्द्व-बहिर्द्वन्द्व

#अन्तर्मुखी-वहिर्मुखी

#अपना-पराया

#अपमान-सम्मान

#अर्पण-ग्रहण

#आदि-अन्त, अनादि

#अर्पित-गृहीत

#अपेक्षा-उपेक्षा

#अनभिज्ञ-अनभिज्ञ

अनाम-सनाम

#अमर-मर्त्य

अमावस्या-पूर्णिमा

#अमृत-विष

#अरुचि-रुचि

अल्प-बहु।‌‌

#अल्पज्ञ-बहुज्ञ

#अल्पायु-दीर्घायु, चिरायु

अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक

अलभ्य-लभ्य

#अवकाश-अनवकाश।

#अवनत-उन्नत

#अवनति-उन्नति

#अवनि-अम्बर

#अवरोध-अनवरोध

#अश्रु-हास

#अस्त-उदय

#उदय-अस्त

#अस्वस्थ-स्वस्थ

#आकर्षण-विकर्षण

#आकाश-पाताल

#आकीर्ण-विकीर्ण

#अंकुचन-प्रसारण

#आगत-अनागत

#आगम-लोप

आगमन-प्रस्थान

#आग्रह-दुराग्रह, अनाग्रह

#आगामी-विगत

#आगे-पीछे

#आचार-अनाचार

#आज़ाद-ग़ुलाम

#आज़ादी-ग़ुलामी

#आतप-अनातप, छाया

#आत्मा-अनात्मा

#आत्मा-परमात्मा

#आदत्त-प्रदत्त

#आदान-प्रदान

#आदिष्ट-निषिद्ध

#आद्य-अंत्य

#आर्द्र-शुष्क

#आदृत-अनादृत

आधार-आधेय, लम्ब

#आधुनिक-प्राचीन

#आना-जाना

#आभ्यंतर-बाह्य

#अभ्यास-अनभ्यास

#आमिष-शाक

#आय-व्यय

#आयात-निर्यात

#आरम्भ-अन्त

#आरूढ़-अनारूढ़

#आदर-अनादर

#आरोह-अवरोह

#आलोक-अंधकार

#आवर्तन-निवर्तन

#आवश्यक-अनावश्यक

#आविर्भाव-तिरोभाव

#आशा-निराशा

#आश्रित-अनाश्रित

#आसक्त-अनासक्त

#आस्तिक-नास्तिक

#आस्था-अनास्था

#आहार-अनाहार

#आह्वान-विसर्जन

#आज्ञा-अवज्ञा

#इकट्ठा-अलग

#इच्छा-अनिच्छा

#इति-अथ

#इष्ट-अनिष्ट

#इहलोक-परलोक

#ईद-मुहर्रम

#ईषत्-अलम्

#ईश-अनीश

#ईश्वर-अनीश्वर

उग्र-सौम्य

#उचित-अनुचित

#उच्च-निम्न

#उत्तम-अनुत्तम, अधम

#उत्तरायण-दक्षिणायन

#उत्कर्ष-अपकर्ष

#उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण

#उत्कृष्ट-निकृष्ट

#उत्थान-पतन

#उत्साह-निरुत्साह, अनुत्साह

#उदय-अस्त

#उदयाचल-अस्ताचल

#उदात्त-अनुदात्त

#उदार-अनुदार, कृपण

उद्धत-विनीत

#उद्यमी-निरुद्यम

#उधार-नक़द

#उद्धत-विनीत

#उन्नति-अवनति

#उन्मीलन-निमीलन

#उन्मुख-विमुख

#उपयोगी-अनुपयोगी

#उन्मूलन-रोपण

#उपकार-अपकार

#उपयुक्त-अनुपयुक्त

#उपयोग-दुरुपयोग

#उपरि-अध:

#उपसर्ग-प्रत्यय

#उपस्थिति-अनुपस्थिति

#उर्वर-अनुर्वर

#ऊँच-नीच

#एकता-अनेकता

#एकत्र-विकीर्ण

#एकतंत्र-बहुतंत्र

#एकत्र-विकीर्ण

#एकमुखी-बहुमुखी

#एड़ी-चोटी

#एकेश्वरवाद-बहुदेववाद

#ऐक्य-अनैक्य

#ऐतिहासिक-अनैतिहासिक

#ऐश्वर्य-अनैश्वर्य

#ऐहिक-पारलौकिक

#औचित्य-अनौचित्य

#औदात्य-अनौदात्य

#अंतर-सतत

#ऋतु-कुटिल, वक्र

#ऋत-अनृत

#कल-आज

#कड़वा-मीठा

#कटु-मधु

#कठिन-सरल

#कठोर-दयालु

#कीर्ति-अपकीर्ति

#कृतज्ञ-कृतघ्न

#कृत्रिम-प्राकृत

#कृष्ण-शुक्ल

#कनिष्ठ-ज्येष्ठ

#कपूत-सपूत

#कृपण-उदार, दानी

#कर्मण्य-अकर्मण्य

#कर्कशा-सुशील

#करुण-दारुण

#कसूरवार-बेकसूर

#क्रय-विक्रय

#कलुष-निष्कलुष

#कुटिल-सरल

#कुरूप-सुन्दर, सुभग

#कुसुम-वज्र

#कोप-कृपा

#कोमल-कठोर

#ख़रीद-विक्री

#खल-सज्जन

#खाद्य-अखाद्य

#खिलना-मुरझाना

#खीझना-रीझना

#खेद-प्रसन्नता

#खंडन-मंडन

#गगन-धरा

#गत-आगत

#गणतंत्र-राजतंत्र

#गमन-आगमन

#गरल-सुधा

#ग़रीब-अमीर, धनी

#ग्रस्त-मुक्त

#गहरा-छिछला

#ज्ञान-अज्ञान

#ग्राम्य-शिष्ट

#गुण-दोष

#गुप्त-प्रकट

#गुरु-लघु

#गीला-सूखा

#गृहस्थ-संन्यासी

#गृह-त्यागी, संन्यासी

#गेय-अगेय

#गोचर-अगोचर

#घटना-बढ़ना

#घर-बाहर

#घरेलू-बनैला

#घात-प्रतिघात

#घृणा-प्रेम

#उतार-चढ़ाव

#चढ़ाव-उतार

#चर-अचर

#चल-अचल

#चाह-अनचाह

#चिन्मय-अचिन्मय, जड़

#चिर-नवीन

#चिरन्तन-नश्वर

#चेतन-अचेतन

#चोर-साधु

#चंचल-स्थिर, अचंचल

#छाँह-धूप

#छली-निश्छल

#जटिल-सरल

#जन्म-मृत्यु

#जय-पराजय

#जड़-चेतन

#जल-स्थल

#जानी-बुढ़ापा

#जागरण-निद्रा

#जाग्रत-सुषुप्त

#जागृति-सुषुप्ति

#जाति-विजाति

#जाड़ा-गर्मी

#जीवन-मरण

#जोड़-घटाव

#ज्योति-तम

#ज्वार-भाटा

#जंगम-स्थावर

#झूठ-सच

#झोपड़ी-महल

#तरुण-वृद्ध

#तृषा-तृप्ति

#ताप-शीत

#तामसिक-सात्विक

#तारीफ़-शिकायत

#तिक्त-मधुर

#तिमिर-प्रकाश

#तीक्ष्ण-कुंठित

#तीव्र-मंद

#तुकांत-अतुकांत

#तुच्छ-महान

#त्याज्य-ग्राह्य

#थोक-खुदरा

#थोड़ा-बहुत

#दक्षिण-वाम

#दिन-रात

#दिवा-रात्रि

#दृढ़-अदृढ़, विचलित

#दृश्य-अदृश्य

#दुर्जन-सज्जन

#दुर्दांत-शांत

#दुर्बल-सबल

#दुर्लभ-सुलभ

दुःशील-सुशील

#दूषित-स्वच्छ

#देय-अदेय

#देव-दानव

#देवता-दानव

#दोष-गुण

#धनी-निर्धन, ग़रीब

#धर्म-अधर्म

#धरा-गगन

#धूप-छाँह

#ध्वंस-निर्माण

#धृष्ट-विनीत